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भागवत श्रवण मात्र से दूर होते कष्ट: अतुल कृष्ण

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अमर उजाला ब्यूरो
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ऊना। जिला के सपौरी गांव में श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन अतुल कृष्ण महाराज ने प्रभु के प्रसंगों से भक्तों निहाल कर किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सुनने मात्र से मुनष्यों के कष्ट दूर हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि भक्ति में ईश्वर पर विश्वास एवं शरणागति परम आवश्यक है। यही कारण है कि दृढ़ आस्था से युक्त जीव की प्रभु सर्वत्र रक्षा करते हैं। हम शांत हों या विक्षिप्त, धनी हो या निर्धन, सुंदर हो या कुरूप, रोगी हो या स्वस्थ, हमारे स्वजन साथ हों या बिछुड़ गए हों, हमारा जीवन हो या मरण, भागवत हमें हर परिस्थिति में एक रस एवं समान रहने की विद्या प्राप्त कराती है। श्रीमद्भागवत केवल ब्राह्मण अथवा संन्यासी के नहीं। अपितु सर्व मंगलमयी तत्व का उपदेश करती है।
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अतुल कृष्ण ने कहा कि एक कसाई भी भागवत धर्म का पालन करें या एक बार भी भगवान का आश्रय हृदय में स्थिर कर ले तो वह भी घोर संसार समुद्र से मुक्त हो जाता है। संकीर्ण सोच के कारण ही लोग भगवान के नाम को भी सांप्रदायिक बना बैठे हैं। जबकि प्रभु का आश्रय हमें सभी संकीर्णताओं से मुक्त कर परम सत्य की ओर अग्रसर करता है। अजामिल, जटायु, शबरी, केवट, निशादराज, सदन कसाई जैसे न जाने कितने पतित एवं अपावन लोगों को प्रभु ने अपने गले से लगाया।
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आज कथा में भगवान श्रीकृष्ण की गोकुल से लेकर श्रीधाम वृंदावन तक की कई बाल लीलाओं को श्रोताओं ने सुनकर आनंद पाया। इस अवसर पर झांकियां भी निकाली गईं। भगवान को 56 भोग अर्पित किए गए। बड़ी संख्या में श्रोताओं के अतिरिक्त सर्वश्री चौधरी रमेश चंद एडवोकेट, प्रकाश चंद धीमान, शिवकुमार ज्वार, ओम, अश्विनी शर्मा नैहरी, सुभाष सिंह पतेहड़ प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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