ऊना। प्राथमिक स्कूलों में शुरू की गई प्री प्राइमरी को लेकर सरकारी स्तर पर ठोस नीति न होने से योजना ठंडे बस्ते में है। सरकार ने योजना तो लागू कर दी लेकिन योजना को लागू करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई। न ही प्री प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ने वाले नौनिहालों की शिक्षा को लेकर सरकार की ओर से कोई नियम बनाया गया है।
इससे सरकार और शिक्षा विभाग की प्राथमिक स्कूलों में नौनिहालों की संख्या बढ़ाने की प्री प्राइमरी योजना दम तोड़ती हुई नजर आ रही है। योजना के शुभारंभ में सरकार ने कहा था कि प्री प्राइमरी में नौनिहालों की पढ़ाई का सारा खर्च सरकार उठाएगी। किताबें, कलर, ड्राइंग बुक्स सब कुछ सरकार ही बच्चों को मुहैया करवाएगी। इसके साथ प्री प्राइमरी नौनिहालों के लिए अलग वर्दी लगाने और इस बारे में गाइड लाइन जारी करने के लिए सरकार विचार कर रही है। लेकिन अभी तक नौनिहालों की पढ़ाई के लिए सरकार की ओर से कोई भी ऐसा कदम नहीं उठा जा रहा है।
इसके साथ-साथ इन नौनिहालों को मिड-डे मील उपलब्ध करवाने के लिए बजट भी उपलब्ध नहीं करवाया गया है। इससे साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि नीति के अभाव में सरकार की यह पहल दम तोड़ती नजर आ रही है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस योजना के विरोध में हैं। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि इस योजना से कई आंगनबाड़ी स्कूल बंद हो जाएंगे। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक एचआर गुलेरिया ने कहा कि प्री प्राइमरी योजना को सफल बनाने के लिए सरकार और विभाग काम कर रहा है।
नहीं आई किताबें : कमलदीप
डाइट देहलां के प्रधानाचार्य कमलदीप सिंह ने कहा कि प्री प्राइमरी कक्षा के नौनिहालों को पढ़ाई के लिए किताबें आदि सरकार की ओर से अभी तक नहीं दी गई हैं। लेकिन नौनिहालों की पढ़ाने के लिए टीजीटी अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
एक तिहाई स्कूलों में शुरू हुई कक्षाएं
इस समय प्रदेश में 10723 और ऊना जिले में 507 विद्यालय हैं। प्रदेश में 3391 स्कूलों और ऊना जिले में 158 स्कूलों में ही निशुल्क प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की गई हैं। ज्यादातर नौनिहाल अभी भी आंगनबाड़ियों में ही जा रहे हैं। इससे नौनिहाल, प्री प्राइमरी योजना का नहीं ले पा रहे हैं। जिसका मुख्य कारण यह भी है कि सभी प्राथमिक स्कूलों में प्री प्राइमरी कक्षाएं शुरू नहीं की गई है।