फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Suraj Lockup Murder Case: अमर उजाला ने किया था पुलिस की फर्जी कहानी का खुलासा, 8 दोषी करार, 27 को होगी सजा

Sun, 19 Jan 2025 10:45 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी/अमर उजाला ब्यूरो/चंडीगढ़/शिमला।

सार

गुड़िया दुष्कर्म व हत्या मामले से जुड़े सूरज लॉकअप हत्याकांड में हिमाचल पुलिस के आईजी जहूर हैदर जैदी और डीएसपी मनोज जोशी समेत आठ पुलिस कर्मी दोषी करार दिए गए हैं। अमर उजाला ने पुलिस की फर्जी कहानी का खुलासा किया था। जानें सारा मामला विस्तार से।
विज्ञापन
गुड़िया मामले से जुड़े सूरज लॉकअप हत्याकांड में आईजी जैदी, डीएसपी जोशी समेत आठ पुलिसकर्मी दोषी करार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

साल 2017 में शिमला जिले के कोटखाई में हुए बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म व हत्या मामले से जुड़े सूरज लॉकअप हत्याकांड में हिमाचल पुलिस के आईजी जहूर हैदर जैदी और डीएसपी मनोज जोशी समेत आठ पुलिस कर्मी दोषी करार दिए गए हैं। चंडीगढ़ में सीबीआई अदालत ने शनिवार को यह अहम फैसला सुनाया है। दोषी करार देने के बाद आईजी और डीएसपी के  साथ पुलिस सब इंस्पेक्टर राजिंद्र सिंह, एएसआई दीप चंद शर्मा, मुख्य आरक्षी मोहन लाल व सूरत सिंह, मुख्य आरक्षी रफी मोहम्मद और कांस्टेबल रंजीत स्टेटा को फिर गिरफ्तार कर लिया है। इन्हें 27 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। इस मामले में गवाहों के बयान और सबूतों के अभाव में तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी को बरी कर दिया गया है।

विज्ञापन

शिमला जिले के कोटखाई में 4 जुलाई 2017 को लापता हुई 16 वर्षीय छात्रा का शव दो दिन बाद दांदी के जंगल में निर्वस्त्र मिला था। इस मामले की जांच के लिए शिमला के तत्कालीन आईजी जैदी की अगुवाई में गठित एसआईटी ने सात लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें से एक नेपाली युवक सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत के दौरान लॉकअप में संदिग्ध मौत हो गई थी। पुलिस ने दावा किया कि एक अन्य आरोपी ने ही इसे लॉकअप में मार दिया। पुलिस की इस कहानी पर संदेह और लोगों के आक्रोश एवं बवाल के बाद यह मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया गया। 

सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि सूरज की मौत पुलिस प्रताड़ना के कारण हुई। इसके बाद सीबीआई ने आईजी जैदी समेत मामले से जुड़े नौ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हत्या, सुबूत खुर्द-बुर्द करने सहित अन्य कई संगीन धाराओं में केस दर्ज किया। साल 2019 में मामले को शिमला जिला अदालत से चंडीगढ़ सीबीआई अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले में बीते 13 दिसंबर को सीबीआई, 16 को आरोपी जैदी, 17 को दीप चंद शर्मा, मोहन लाल, 18 को सूरत सिंह, 19 को मनोज जोशी और डीडब्ल्यू नेगी, 20 दिसंबर को राजिंद्र सिंह, रफी मोहम्मद व रणजीत सटेटा का पक्ष सुना और आखिरी बहस हुई थी। 
 

आरोपी नंबर-तीन की ओर से बार-बार कोर्ट में आवेदन दायर करने के मामले में देरी हुई। एसएचओ कोटखाई थाने के तीन बयान दर्ज हुए। इस साल 16 जनवरी को हुई सुनवाई में कोर्ट ने तीन नंबर आरोपी का पक्ष सुनने एवं साक्ष्य देखने के बाद ऑर्डर के लिए 18 जनवरी की तारीख फिक्स कर दी थी। शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान मामले में नामजद सारे आरोपी कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट ने सभी पक्षों द्वारा दी गई दलीलों, गवाहों के बयान व सबूतों के आधार पर जैदी और डीएसपी सहित आठ आरोपियों को दोषी करार दे दिया, जबकि एसपी नेगी को बरी कर दिया।

संतरी की गवाही और डिजिटल रिकॉर्ड बने अहम सुबूत
मामले में कोटखाई थाने के संतरी दिनेश की गवाही सबसे अहम साबित हुई। संतरी ने ही थाने में पुलिसकर्मियों की पिटाई से सूरज की मौत का खुलासा किया था। इसकी रिकॉर्डिंग डीएसपी मनोज जोशी के मोबाइल में सेव थी। यह रिकार्डिंग सबसे पुख्ता सुबूत बनी। इस मामले में दोनों पक्षों के 100 से अधिक गवाह थे। सीबीआई ने आरोप साबित करने के लिए अदालत में 52 गवाह पेश किए। दरअसल, गुड़िया हत्याकांड में जांच के लिए आईजी जहूर हैदर जैदी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई थी। जांच टीम ने नेपाल मूल के युवक सूरज समेत सात लोगों हिरासत मंे लिया था। लॉकअप में उसे नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म कर हत्या का इल्जाम कबूलने के लिए कहा। जब सूरज ने गुनाह कबूल नहीं किया तो पुलिसकर्मियों ने उसकी पूरी रात पिटाई की। पिटाई के कारण उसकी लॉकअप में ही मौत हो गई। सब इंस्पेक्टर राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद शर्मा, हेड कांस्टेबल मोहन लाल, सूरत सिंह, रफी मोहम्मद और कांस्टेबल रंजीत ने सूरज की पिटाई की थी।

डीएसपी ने आलाधिकारियों से छिपाई लॉकअप में सूरज की मौत की खबर
कोटखाई थाने के संतरी दिनेश ने सूरज की मौत होने की सूचना फोन पर रात को ही डीएसपी मनोज जोशी को दे दी थी। डीएसपी के फोन में संतरी की सारी बात रिकॉर्ड हो गई, लेकिन डीएसपी ने आलाधिकारियों को इसकी सूचना ही नहीं दी। उसने अपने स्तर पर ही मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। बाद में जब मामला सीबीआई के पास पहुंचा तो एसआईटी के सभी सदस्यों के खिलाफ हत्या की धारा 302 सहित 330, 331, 348, 323, 326, 218,195,196, 201,210बी व 330 के तहत केस दर्ज किया गया। सीबीआई ने संतरी के बयान दर्ज कर, सबसे पहले डीएसपी मनोज जोशी का मोबाइल कब्जे में लिया। इसमें हत्या की सूचना देने की रिकॉर्डिंग मिल गई। इसे जांच टीम ने ट्रायल के दौरान अदालत में पेश किया। इसके साथ संतरी दिनेश की गवाही सबसे अहम साबित हुई।

गुड़िया दुष्कर्म व हत्याकांड में चिरानी को हो चुकी है उम्रकैद
बहुचर्चित गुड़िया मामले में सत्र एवं जिला न्यायाधीश शिमला राजीव भारद्वाज की विशेष अदालत ने 18 जून 2021 को अनिल कुमार उर्फ नीलू उर्फ कमलेश को नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या की धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अप्रैल 2018 में सीबीआई ने चिरानी नीलू को गिरफ्तार किया था। 28 अप्रैल 2021 को शिमला की विशेष अदालत ने दोषी करार दिया था।  पुलिस की ओर से सूरज समेत पहले गिरफ्तार किए गए सभी सात लोगों को निर्दोष पाया गया।

कोर्ट का फैसला आते ही रोने लगे दोषी पुलिसकर्मियों के परिजन
इस मामले में नामजद सभी आरोपी अपने परिजनों के साथ अदालत में पहुंचे थे। शनिवार दोपहर आरोपियों को जैसे ही दोषी करार दिया गया तो अदालत के बाहर हड़कंप मच गया। इसके बाद सीबीआई अदालत के बाहर अतिरिक्त पुलिस फोर्स को तैनात किया गया। अदालत की ओर से फैसला सुनाने के तुरंत बाद दोषियों को हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद सभी दोषियों के परिजन उन्हें गले लिपट कर रोने लग गए।

फैसले का करेंगे अध्ययन : सीएम
सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला आने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मीडिया से कहा कि हम अदालत के निर्णय का सम्मान करते हैं। हालांकि, मैंने अभी पूरा फैसला पढ़ा नहीं है, मामले का पूरी तरह से अध्ययन किया जाएगा। दोषी बाहर न रहें और किसी निर्दोष को सजा न मिले, यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे।
विज्ञापन

अमर उजाला ने किया था पुलिस की फर्जी कहानी का खुलासा
अमर उजाला ने पुलिस की फर्जी कहानी का खुलासा किया था। गुड़िया मामले से जुड़े सूरज हत्याकांड में संतरी दिनेश शर्मा अहम कड़ी निकला। शुरू में सीबीआई ने भी उस पर ज्यादा फोकस नहीं किया। संतरी दिनेश शर्मा बहुत डरा हुआ था। यह उसी लॉकअप की निगरानी में नियुक्त था, जिसमें नेपाली सूरज की हत्या हुई थी। सूरज हत्याकांड के बाद सस्पेंड हुआ तो उसने खुद को एक कमरे  में बंद कर लिया था। उसे डर था कि उसकी जान पर भी संकट आ सकता है। सीबीआई तफ्तीश के अनुसार पुलिस अधिकारी खुद उसे फंसाने की योजना बना चुके थे कि उसकी निगरानी में एक अन्य आरोपी ने सूरज को लॉकअप में मौत के घाट उतार दिया। संतरी तनाव में था। उसके परिजनों ने अमर उजाला से संपर्क किया। अमर उजाला ने 'संतरी बोला- मेरे सामने राजू ने नहीं मारा सूरज को' शीर्षक से उसकी कहानी छापी थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें