इस दौरान पिता के सब्र का बांध भी आखिर में टूट पड़ा। जैसे ही बलिदानी की पार्थिव देह को आंगन में रखा तो बलिदानी सूबेदार मेजर पवन कुमार की पत्नी सुषमा देवी और बेटी अनामिका बिलखने लगी। इस दौरान पिता ने जो दो दिन से सब्र का बांध बांधा था, वह भी आखिर में टूट पड़ा। बेटी और पत्नी को बिलखते देख वह भी रोने लग पड़े। बेटे की शहादत के बाद अभी तक उनकी आंखों से एक आंसू तक नहीं निकला था लेकिन अंत में वह भी रोने लगे। इस दौरान सबसे बड़ी बात ये रही कि कुछ देर के लिए हल्की बूंदाबांदी भी हुई। यह देख कर ऐसा लग रहा था कि मानों देश के लाल के बलिदान पर आसमान भी रो रहा हो।
हजारों लोगों ने 39 मील से घर तक निकाली अंतिम यात्रा
पार्थिव देह 39 मील में दो बजे के करीब पहुंची। यहां सिहोलपुरी स्थित उनके घर तक हजारों लोगों ने अंतिम यात्रा में भाग लिया। लोगों ने बलिदानी सूबेदार मेजर पवन कुमार अमर रहे, देखो-देखो कौन आया, शेर आया शेर आया, पाकिस्तान मुर्दाबाद और हिंदुस्तान सेना जिंदाबाद के नारे करीब ढाई घंटे तक गूंजते रहे। अंतिम यात्रा में हजारों लोगों का जमावड़ा था। लोगों में पाकिस्तान के प्रति रोष वह भारतीय सेवा के प्रति सम्मान स्पष्ट झलक रहा था।
बलिदानी की शव यात्रा में शामिल हुए हजारों लोग
बलिदानी के सम्मान में सेना ने गार्ड ऑफ आनर देते हुए शोक रूप में शस्त्र उल्टे कर शोक सलामी दी। इसके बाद शहीद की शान में तीन चक्र हवाई फायर कर अपने सहकर्मी को अलविदा कहा। बलिदानी की शव यात्रा के दौरान क्षेत्र के हजारों लोग शामिल हुए। शव यात्रा के दौरान जहां हर आंख नम थी, वहीं लोगों के चेहरे पर पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा साफ झलक रहा था।