शूलिनी विश्वविद्यालय से बीटेक बायोटेक्नोलॉजी शिक्षा प्राप्त कर चुके सोलन के योगेंद्र वर्मा ने सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं।
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शूलिनी विश्वविद्यालय से बीटेक बायोटेक्नोलॉजी शिक्षा प्राप्त कर चुके सोलन के योगेंद्र वर्मा ने सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। अमरीका के उच्च शिक्षण संस्थानों में शुमार स्टांफोर्ड विश्वविद्यालय में योगेंद्र को सवेतन इनटर्नशिप के लिए चुना है।
स्टांफोर्ड का नाम विश्व की टाप 5 विश्वविद्यालयों में शुमार है। योगेंद्र का चयन स्टांफोर्ड के एमएस बायोटेक्नोलॉजी और बीओइंफोमटिक्स प्रोग्राम के स्टेम सैल बायोटेक्नोलॉजी, प्रयोगशाला प्रबंधन कोर्स के लिया हुआ है। इसके लिए 10 लोगों का चयन इस सीआईआरएम ब्रिजस टु स्टेम सैल रिसर्च एंड थेरेपी ट्रेनिंग ग्रांट ट्रेनी अवार्ड के लिए हुआ है। इसमें योगेंद्र अकेला भारतीय है। इस अवार्ड से योगेंद्र को एक साल के लिए 37,000 अमेरिकी डालर (करीब 25 लाख रुपये) दिए जाएंगे। इसके अलावा 1,000 डालर ट्रेवल खर्च के मिलेंगे। यह ग्रांट कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट फॉर रीजैनेरेटिव मेडिसिन द्वारा प्रायोजित है। योगेंद्र सोलन का रहने वाला है।
उन्होंने शूलिनी विश्वविद्यालय से की शिक्षा ग्रहण की है। पिता फार्मा-बायोटेक संबंधित दो कंपनियों हिमाचल फाइटोकेम और कनारिया एग्रोकेम के मालिक हैं। उनकी इच्छा स्वरूप योगेंद्र ने गणित का छात्र होने के बावजूद बीटेकबायोटेक में दाखिला लिया ताकि वो आगे चल कर अपने पिता का बिजनस संभाल सकें। शूलिनी विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफेसर प्रेमकुमार खोसला ने योगेंद्र को इस सफलता पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। कहा कि ये शूलिनी विश्वविद्यालय के लिए बहुत गर्व कि बात है कि यहां के एक छात्र ने वैश्विक स्तर पर सफलता की नई बुलंदियों को छुआ है।