फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बागवानी क्षेत्र में सहकारी समितियों का मजबूत नेटवर्क होगा तैयार : जगत नेगी

विज्ञापन
विज्ञापन
फील्ड में पहुंचे बागवानी विभाग के अधिकारी और नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक
विज्ञापन

नौणी विवि में अल्टरनेरिया और मार्सोनिना पत्ता धब्बा रोग पर लगाई कार्यशाला
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। बागवानी विभाग के अधिकारी और नौणी विवि के वैज्ञानिक किसानों-बागवानों की फील्ड में पहुंचकर मदद करें। यह निर्देश राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने नौणी विवि में सेब में अल्टरनेरिया और मार्सोनिना पत्ता धब्बा रोग के कारण उपचारात्मक रणनीतियों पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के दौरान दिए।
उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से न केवल उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है बल्कि विपणन अधोसंरचना को गांव-गांव तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में सेब सहित अन्य फलों को विपणन की दृष्टि से अच्छा मंच उपलब्ध करवाने के लिए सहकारी समितियों का सुदृढ़ीकरण आवश्यक है। प्रदेश सरकार सेब सहित अन्य फलों के रोगों के समुचित प्रबंधन और उपचार के लिए अनेक स्तरों पर कार्य कर रही है। इस दिशा में नौणी विश्वविद्यालय की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि कीट प्रबंधन, रोग उपचार और भविष्य में रोग के प्रसार को न्यून करने के लिए डाटा संग्रहण और वैज्ञानिक निष्कर्ष को अत्यंत महत्वपूर्ण समझें। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विश्लेषण ही प्रबंधन का मुख्य आधार होना चाहिए। रोग नियंत्रण एवं उपचार के लिए वैज्ञानिकों की ओर से दिए गए परामर्श एवं बागवानों के सुझावों को अपनाया जाएगा। बागवानी विभाग एवं नौणी विश्वविद्यालय परामर्श के उपरांत आवश्यकता आधारित कीटनाशक उपयोग के विषय में समय सारिणी तैयार करने पर विचार करेंगे। डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने विषय की सारगर्भित जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शीघ्र ही विषय पर ऑनलाइन सत्र आरंभ करेगा। आधा-आधा दिन के यह सत्र प्रत्येक 15 दिन में एक बार आयोजित किए जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

इनसेट
इन विशेषज्ञों ने दी जानकारी
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों की ओर से समुचित जानकारी प्रदान की गई। इसमें क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मशोबरा की कीट वैज्ञानिक डॉ. संगीता शर्मा ने सेब में माइट के प्रकार, बढ़ोतरी के कारण, निवारण और प्रबंधन विषय पर जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि माइट को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। कार्यशाला में नौणी विश्वविद्यालय की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शालिनी वर्मा, डॉ. नीलम कुमारी, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र रोहड़ू की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ऊषा शर्मा, बीटीएम.कटराईं, कुल्लू की नीजू राणा ने सारगर्भित जानकारी प्रदान की। प्रदेश के विभिन्न भागों से आए प्रगतिशील बागवानों ने विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यशाला में वैज्ञानिकों एवं बागवानों ने स्पष्ट किया कि स्वस्थ मृदा ही स्वस्थ पौधा प्रदान कर सकती है और इन्हीं के माध्यम से बेहतर फसल प्राप्त की जा सकती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें