डीबीटी प्रक्रिया में आ रही परेशानी, विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति प्रक्रिया भी लटकी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। सोलन के विभिन्न सरकारी और निजी स्कूलों में विद्यार्थियों के आधार कार्ड अपडेट न होने और पोर्टल पर दर्ज न होने के कारण करीब 8,600 की अपार आईडी नहीं बन पाई है। इस तकनीकी और डेटा से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए अब शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया है, ताकि जमीनी स्तर पर आ रही अड़चनों को दूर किया जा सके।
यू-डाइस प्लस पोर्टल पर ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज न होने से विद्यार्थियों की डिजिटल पहचान नहीं हो पा रही है। इससे मिलने वाली छात्रवृत्ति और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की प्रक्रिया बीच में ही अटक गई है। बच्चों के डिजिटल रिकॉर्ड को सुधारने और शिक्षकों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए डाइट सोलन में यू डाइस प्लस, अपार आईडी और आधार अपडेशन को लेकर एक विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया।
इस कार्यशाला की अध्यक्षता खंड शिक्षा अधिकारी एचआर चंदेल ने की, जबकि शिक्षा उपनिदेशक गुणवत्ता शिक्षा डॉ. राजेंद्र वर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। इस दौरान डाइट सोलन के आईटी सेल से गोविंद ठाकुर ने शिक्षकों को पोर्टल के वर्क फ्लो और डेटा प्रबंधन की बारीकियों की जानकारी दी गई। यह कार्यशाला समग्र शिक्षा के तहत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान सोलन के दिशा-निर्देशों पर की गई है। खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूलों के स्तर पर आ रही तकनीकी अड़चनों और फील्ड-स्तर की जिज्ञासाओं का समाधान करना है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक स्कूल से केवल वही शिक्षक या कर्मचारी इस कार्यशाला में शामिल हुआ, जो प्रत्यक्ष रूप से इस डेटा कार्य को संभाल रहा है ताकि बच्चों के डिजिटल रिकॉर्ड अधिक सटीक और पारदर्शी बन सकें।
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5 प्रतिशत बच्चों का विवरण अधूरा
यूडाइस प्लस पोर्टल से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, सोलन जिले में कुल नामांकित करीब 1.72 लाख विद्यार्थियों में से लगभग 5 प्रतिशत बच्चों का आधार विवरण पोर्टल पर उपलब्ध या अपडेटेड नहीं है। प्रतिशत के हिसाब से यह आंकड़ा सीधे तौर पर 8,600 विद्यार्थियों बैठता है।
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डिजिटल युग में विद्यार्थियों से जुड़ी लगभग सभी सरकारी योजनाओं, स्कॉलरशिप और डीबीटी प्रक्रियाओं के लिए आधार आधारित सत्यापन अनिवार्य है। अपार आईडी भी यूडाइस प्लस रिकॉर्ड और आधार सत्यापन के आधार पर ही जारी की जाती है। रिकॉर्ड अधूरा होने के कारण डिजिटल बेनेफिट डिलीवरी सिस्टम में पहचान सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। इससे छात्रवृत्ति का पैसा विद्यार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित होने में व्यावहारिक अड़चनें आ रही हैं।