सोलन में राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष ने की बैठक,जातिवाद और भेदभाव पर हुई चर्चा
अनुसूचित जाति पर रखे गए गांव के नामों को बदलने को कहा
हरिजन शब्द को हर जगह से पूरी तरह से हटाने का भी किया आग्रह
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय सोलन में हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान के साथ एक बैठक आयोजित की गई। इसमें अनुसूचित जाति की महिलाओं और समाज के अन्य सदस्यों ने यूजीसी एक्ट का समर्थन करते हुए इसे प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों में लागू करने की मांग उठाई। बैठक में जाति के आधार पर हो रहे अत्याचारों, अनुसूचित जाति नाम पर रखे गए गांवों के नाम बदलने और हरिजन शब्द को पूरी तरह से हटाने का भी मुद्दा उठाया गया। बैठक में शामिल सदस्यों ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति के छात्रों के साथ अत्याचार बढ़ रहे हैं और इन मामलों को रोकने के लिए यूजीसी एक्ट को लागू करना अत्यंत जरूरी है। महिलाओं ने इस बात को गंभीरता से उठाया कि यदि इन मुद्दों को समय रहते संबोधित नहीं किया गया तो यह समस्या और बढ़ सकती है। इसके अलावा, गैर सरकारी संगठनों और नगर निगमों के प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि जिले में कई गांवों के नाम अनुसूचित जाति समुदाय के नाम पर रखे गए हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों को सामाजिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने राज्य अनुसूचित जाति आयोग से इन गांवों के नाम बदलने की अपील की, क्योंकि यह नाम स्थानीय लोगों की भावनाओं को आहत करते हैं। बैठक में हरिजन शब्द के उपयोग पर भी सवाल उठाए गए। सदस्यों ने कहा कि आज भी कई संस्थानों में अनुसूचित जाति के लोगों को हरिजन शब्द से संबोधित किया जाता है, जिससे समाज में भेदभाव की भावना और भी गहरी हो रही है। उन्होंने इस शब्द को सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों से पूरी तरह हटाने की मांग की। बैठक में छुआछूत की प्रथा पर भी चर्चा हुई, जिसमें बताया गया कि गांवों में अब भी अनुसूचित जाति के लोगों के लिए अलग-अलग बावड़ियां बनाई जाती हैं। इससे उनकी भावनाओं को आहत होता है और यह प्रथा समाज में भेदभाव को बढ़ावा देती है। बैठक में उठाए गए सभी मुद्दों को सुनने के बाद कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि इन सभी समस्याओं को जल्द हल किया जाएगा। इसके लिए बुधवार को जिला अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी, जिसमें इन समस्याओं को दोबारा उठाया जाएगा और ग्रामीण स्तर की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। प्रदेश स्तर की समस्याओं को सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
पेंशनरों के अटके आवेदन
बैठक में पेंशनरों के अटके हुए आवेदन पत्रों पर भी चर्चा की गई। अनुसूचित जाति से संबंधित पेंशनरों ने कहा कि उनके पेंशन आवेदन लंबित पड़े हैं, जिसके कारण उन्हें सरकार की ओर से दी जाने वाली पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस पर जल्द कार्रवाई करने की मांग की गई।
कोर्ट में वकील की अनुपलब्धता
बैठक में यह समस्या भी सामने आई कि अनुसूचित जाति के लोगों को कोर्ट में केस लड़ने के लिए सरकार की ओर से वकील नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि अनुसूचित जाति से संबंधित व्यक्तियों को कानूनी सहायता मुहैया कराई जाए, लेकिन उन्हें इस हक से वंचित किया जा रहा है।
आंगनबाड़ी में भेदभाव
जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि गांवों में लोग अपने बच्चों को आंगनबाड़ी में भेजने से कतराते हैं, क्योंकि वहां काम करने वाली महिलाएं अनुसूचित जाति से संबंध रखती हैं। इस कारण बच्चों में शुरुआत से ही जाति आधारित भेदभाव की भावना पैदा हो रही है।