बाढ़ के ऊपर छलांग लगा कर नष्ट कर रहे फसलें
नील गाय और बारहसिंघा पहुंच रहे नुकसान
किसान रात भर ठिकरी पहरा देने के लिए मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। जंगल से सटी नालागढ़ की पंचायतों में जंगली जानवरों ने आतंक मचा रखा है। नीलगाय और बारहसिंघा गेहूं की फसल तबाह कर रहे हैं। ये जानवर किसानों की तारबाड़ के बावजूद उसके ऊपर से छलांग लगाकर खेतों तक पहुंच रहे हैं। जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए किसानों ने ठीकरी पहरा लगाया हुआ है।
नालागढ़ के दभोटा, ढांग निहली, भोगपुर, बरूणा, नवांगांव, बघेरी, बेरछा, मस्तानपुरा, बगलैहड़ और गुल्लरवाला-करसोली पंचायतें जंगलों के साथ सटी हुई हैं। इन पंचायतों में किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। दभोटा के सुरमुख सिंह, मझोली के सुच्चा सिंह, बघेरी के तेजा सिंह, बेरछा के जोगिंद्र पाल, गुल्लरवाला-करसोली के विजय भल्ला, मस्तानपुरा के रोशन लाल और नंगल के टेक चंद ने बताया कि लोग जंगली जानवरों से बचाव के लिए रात भर ठीकरी पहरा दे रहे हैं।
किसान खेतों में धुआं भी करते हैं, ताकि जंगली जानवर फसलों को नुकसान न पहुंचाएं। इसके बावजूद नीलगाय तारबाड़ के ऊपर से छलांग लगाकर खेतों तक पहुंच जाती है। किसानों का कहना है कि जब तक गेहूं की फसल पककर तैयार नहीं हो जाती, तब तक उन्हें लगातार रखवाली करनी पड़ेगी। ठंड के मौसम में लोग खेतों के किनारे घास की झोपड़ियां बनाकर रहने को मजबूर हैं।
किसान सुरमुख सिंह ने कहा कि नालागढ़ के किसानों को फसल घर तक पहुंचाने में काफी पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। पहले बारिश न होने के कारण ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ी, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई। अब किसानों को फसलों की रखवाली के लिए रात-रात भर खेतों में जागना पड़ रहा है।