बीबीएन में प्राचीन जल स्रोत (कुएं) का पानी अब लोग प्रयोग में नहीं लाते। गर्मियों के दिनों में पेयजल आपूर्ति का प्रमुख साधन आईपीएच और सेहत विभाग की अनदेखी का शिकार हुआ है। पेयजल गुणवत्ता की परख को लेकर दोनों विभागों ने कोई कवायद शुरू नहीं की। लिहाजा दूषित पानी का अंदेशा जताते हुए लोगों ने इन कुओं से पानी लेना ही बंद कर दिया। कुओं के पानी में तरल पदार्थ तैैरने लगे हैं।
लोगों के मुताबिक बीबीएन के बद्दी, बरोटीवाला, मलपुर, फौजी कौलानी किशनपुरा, मानपुरा, मदन पुरा और नालागढ़ में दो दर्जन से अधिक कुएं हैं, जिनसे एक दशक पूर्व लोग पानी पीने के प्रयोग में लाते थे। लेकिन औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद लोगों ने इस कुओं का पानी पीना छोड़ दिया है। कुएं सूख चुके हैं और पानी न के बराबर है। बद्दी के राम लोक कौशल, गीता राम भारद्वाज, हंसराज भारद्वाज, कमल वेद, मलपुर के प्रधान करनैल सैणी, संजीव ठाकुर, फौजी कालोनी किशनपुरा के कुलवीर राणा तथा मानपुरा के देवराज ठाकुर ने बताया कि औद्योगिक इकाईयों के लगने से कुएं का पानी खराब हो गया है। पानी के ऊपर तरल पदार्थ तैरने लगे हैं जिससे लोगों ने इसे पीना छोड़ दिया है।
पानी की गुणवत्ता जानने के लिए किसी भी विभाग ने पहल नहीं की है। न ही पानी की चेकिंग करने का बंदोबस्त किया है। उन्होंने विभाग से बचे कुओं के पानी के सैंपल लेेने की मांग की है। सीएमओ डॉ. आरके दरोच ने बताया कि शीघ्र ही बीबीएन की कुओं के पानी के सैंपल लिए जाएंगे। सैंपल की प्रयोगशाला में जांच कर उसकी गुणवत्ता का पता लगाया जाएगा।
सैंपल फेल होने का दावा : शर्मा
हिम परिवेश संस्था के महासचिव बाल कृष्ण शर्मा ने बताया कि संस्था ने चेन्नई की एक निजी प्रयोगशाला से मदनपुरा, किशनपुरा, मलपुर के पांच कुएं के पानी के सैंपल जांच करने के लिए भेजे थे। जांच के दौरान पानी को केमिकल की मात्रा पाई गई तथा यह पानी पीने लायक नहीं पाया गया। आईपीएच के एक्सईएन सुनील कनोत्रा ने माना कि कुएं का पानी खराब हो सकता है। इसकी जांच स्वास्थ्य विभाग करता है। आईपीएच योजनाओं के तहत वितरित करने वाले पानी की जांच करते है।