मंडी में बाहरी राज्यों के व्यापारी गीली फसलों के लगा रहे कम दाम
आढ़तियों ने अपने स्तर पर लगाए हैं तिरपाल, बारिश में वह भी नाकाम
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले की सबसे बड़ी सोलन सब्जी मंडी में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण किसानों और आढ़तियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में सब्जियों की नीलामी के लिए शेड की व्यवस्था नहीं है, जिससे इस मानसून सीजन में किसानों और कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है।
शेड न होने के कारण शिमला मिर्च, गोभी, बैंगन, टमाटर, समेत दर्जनों अन्य सब्जियों को खुले आसमान के नीचे बेचना पड़ रहा है। बारिश से बचाव के लिए कुछ आढ़तियों ने अपने स्तर पर दुकानों के बाहर तिरपाल जरूर लगाए हैं, लेकिन भारी बारिश के आगे ये तिरपाल भी नाकाम साबित हो रहे हैं और पानी टपकने से खुले में रखी सब्जियां खराब हो रही हैं। मंडी में आलू, प्याज और लहसुन के लिए तो शेड की व्यवस्था है, लेकिन अन्य नकदी फसलों के लिए कोई प्रबंध नहीं है। इसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ रहा है। बाहरी राज्यों से आए व्यापारी सब्जियां गीली होने का हवाला देकर उनके दाम बहुत कम लगा रहे हैं। लगातार बारिश से सब्जियां मंडी में ही सड़ने लगी हैं। इस मंडी में न केवल स्थानीय बल्कि शिमला और सिरमौर जिलों से भी बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल लेकर पहुंचते हैं।
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सितंबर से शुरू होगा 1.50 करोड़ का रूफिंग कार्य
इस समस्या को लेकर मंडी समिति सोलन के सचिव राघव सूद ने कहा कि किसानों और आढ़तियों की यह परेशानी उनके संज्ञान में है और इसके समाधान के लिए योजना तैयार कर ली गई है। उन्होंने बताया कि मंडी में रूफिंग (छत) डालने का कार्य आगामी सितंबर से शुरू कर दिया जाएगा। इस पूरी परियोजना के लिए करीब 1.50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है और वर्तमान में इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। सचिव ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस समस्या का स्थाई हल निकाल लिया जाएगा।