ईएनटी, एमडी और रेडियोलॉजिस्ट के पद खाली होने से झेलनी पड़ रही दिक्कतें
निजी क्लीनिकों में जाने के लिए मजबूर मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। नालागढ़ अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट पिछले पांच साल से नहीं है, जबकि मेडिसिन और ईएनटी विभाग में भी चिकित्सक नहीं हैं। इससे रोगियों को निजी क्लीनिकों में जाना पड़ता है, जहां उन्हें इलाज के लिए कई गुना अधिक खर्च करना पड़ता है। डेढ़ साल पहले अस्पताल में एक चिकित्सक को रेडियोलॉजिस्ट की ट्रेनिंग दी गई थी, जो सप्ताह में दो दिन बद्दी भी जाता था, लेकिन उसका स्थानांतरण होने के बाद यह सुविधा पूरी तरह बंद हो गई। नालागढ़ अस्पताल में प्रतिदिन करीब 700-800 मरीज आते हैं। डेढ़ साल पहले दो चिकित्सकों ने अनुबंध पूरा होने के बाद इस्तीफा दे दिया, जिनमें एक ईएनटी विशेषज्ञ भी था। तब से उनके स्थान पर कोई चिकित्सक नहीं आया। यहां करीब दो साल से कोई एमडी नहीं है और रेडियोलॉजिस्ट का पद लंबे समय से खाली है। प्रतिदिन 60-70 ईएनटी मरीजों को अब निजी चिकित्सालयों की ओर रुख करना पड़ता है। भाजपा प्रदेश सोशल मीडिया सह संयोजक सौरभ धीमान ने बताया कि बीबीएन क्षेत्र से सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व मिलता है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने में सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय यहां जो स्टाफ था, उसे भी बदल दिया गया। वरिष्ठ नागरिक यादव किशोर गौतम ने कहा कि रेडियोलॉजिस्ट न होने से सबसे ज्यादा परेशानी वरिष्ठ नागरिकों और गर्भवती महिलाओं को होती है। उनका सुझाव है कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए। न्यू नालागढ़ की अंजना शर्मा ने बताया कि नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण सड़कों पर दुर्घटनाएं और उद्योगों में घटनाएं होती रहती हैं। वहीं, ऑप्टोमेट्रिस्ट का पद भी खाली होने से आंखों की प्राथमिक जांच में भी दिक्कत हो रही है।
कोट
लगातार विभाग के साथ डॉक्टरों की कमी के मुद्दे को उठा रहे हैं और आशा है कि शीघ्र ही खाली पदों को भरा जाएगा।
डॉ. कवि राज नेगी,बीएमओ,नालागढ़