फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ट्रेड यूनियनों का केंद्र के खिलाफ हल्ला बोल

Thu, 10 Mar 2016 10:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
विज्ञापन
हस्‍तरेखा कैर‌ियर
विज्ञापन
 श्रम कानूनों के बदलाव को श्रमिक विरोधी करार देते हुए ट्रेड यूनियनों ने सोलन मुख्यालय में केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला। शहर के ट्रेड यूनियनों ने वीरवार को डीसी राकेश कंवर के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। वक्ताओं ने कहा कि सरकार श्रम-कानूनों में कर्मचारी-विरोधी बदलाव करने जा रही है। इसे तुरंत रोकने की जरूरत है। आरोप लगाए कि कारपोरेट जगत के पक्ष में श्रम कानून बनाए जा रहे हैं। यदि सरकार द्वारा श्रम विरोधी कानून बनाए जाते हैं, तो श्रमिकों के एक बड़े वर्ग को इसके विपरीत परिणाम भुगतने होंगे। इस दौरान प्रदेश एटक अध्यक्ष जगदीश चंद्र भारद्वाज के अलावा सचिव सीटू एनडी रनोट और प्रदेश सचिव एवं जिला अध्यक्ष एटक सुरजीत सिंह राणा मौजूद रहे।
विज्ञापन

इन श्रम कानूनों में हो रहा बदलाव
ट्रेड यूनियनों के अनुसार सरकार द्वारा कुछ अहम श्रम कानूनों में बदलाव किए जा रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से लघु फैक्टरी रोजगार नियम एवं सेवा शर्तें जैसे नए कानून की अनुशंसा करने के साथ-साथ फैक्टरी एक्ट, औद्योगिक विभाग अधिनियम,1947-औद्योगिक रोजगार (स्थाई आदेश) कानून, 1946- न्यूनतम मजदूरी कानून, 1948-वेतन भुगतान कानून, 1936-बोनस भुगतान कानून,1965-कर्मचारी बीमा कानून (इएसआई) भविष्य निधि (कर्मचारी भविष्य निधि), मातृत्व लाभ, कर्मचारी मुआवजा कानून-अंतर राज्य प्रवासी मजदूर कानून, दुकान एवं प्रतिष्ठान कानून, समान काम-समान वेतन कानून सहित बाल मजदूरी-निषेध कानून जैसे श्रमहित नियमों को समाप्त कर दिया जाएगा।

पसरेगा जंगल राज
ट्रेड यूनियन ग्रुप ने ज्ञापन में कहा कि देश का 80 प्रतिशत मजदूर इन्हीं कानूनों के परिधि में आता है। अगर कारखानों विभागों, प्रतिष्ठानों में इन नियमों को हटा दिया गया तो देश में जंगलराज कायम हो जाएगा। साथ ही बेगार के युग की स्थिति पैदा हो जाएगी। कर्मचारियों ने कहा कि उपयुक्त नियम न होने से बड़े कारखानों के मालिक और ठेकेदार आउट सोर्स द्वारा काम करवाकर शोषण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में भी सभी पुराने श्रम नियमों और अधिनियमों को समाप्त करना दोषपूर्ण है।
विज्ञापन


ट्रेड यूनियन की मांगें
श्रम हित कानूनों में संशोधन कर कारपोरेट पक्ष में कानूनों पर रोक, महंगाई के चलते हो रही जमाखोरी पर रोक लगाकर कालाबाजारी बंद की जाए, सार्वजनिक वितरण प्रणाली मजबूत हो, न्यूनतम वेतन (15000 प्रतिमाह) से लागू हो, यूनियनों का पंजीकरण 15 दिन के भीतर अनिवार्य हो, सरकारी एवं निजी उद्योगों में स्थायी और उत्पादन कार्याें में ठेका श्रमिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगे, उन्मूलन अधिनियम 1970 की धारा (20) में अधिसूचना जारी हो, निर्माण कार्यों एवं कृषि बागवानी मजदूरों को सुरक्षा गारंटी, स्कीम और आशा वर्कर्स, मीड डे मील वाटर गार्ड, आंगनबाड़ी, अनुबंध श्रमिकों को न्यूनतम वेतन के साथ सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए, श्रमिकों की समस्याओं और श्रम कानून लागू करने के लिए श्रम विभाग को मजबूत बनाया जाए, छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की मुकदमा वापसी के साथ उसे सुरक्षा मुहैया करवाई जाए मांगें शामिल रहीं।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
MORE
AU ऐप में पढ़ें