कुनिहार में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करते भक्त। संवाद
कुनिहार में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन सुनाए कई प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। कुनिहार के प्राचीन ठाकुर द्वारा मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा वाचक आचार्य हेमंत गर्ग ने जन्माष्टमी के महत्व व श्री कृष्ण भगवान के जन्म का वर्णन किया। उन्होंने सुंदर भजनों के साथ श्रीकृष्ण भगवान की अनेक लीलाओं का गुणगान करते हुए सभी सनातन प्रेमियों से कृष्ण भगवान के उपदेशों पर चलने का आह्वान किया।
छठे दिन की कथा में जीवात्मा और परमात्मा के अनोखे मिलन का प्रसंग सुनाया गया, जिसमें गोविंद भगवान ने बृजवासियों की रक्षा के लिए अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया। उन्होंने कहा कि गोवर्धन भगवान है वह परमात्मा की शक्ति है जो हमें वनस्पतियों व औषधीय के रूप में है जो इस धरा की सुगंध के रूप में हमें हमेशा अलौकिक कृपा प्राप्त करवाती है। इसलिए हमें गोवर्धन का संरक्षण करना चाहिए। उसके बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के साथ विवाह की कथा का सार सुनाया गया।
कथा व्यास ने कहा कि हर मनुष्य प्रयास करे कि अपने से कभी कोई बुरा कर्म, कोई पाप न हों क्योंकि हम जो भी अच्छे बुरे कर्म करते हैं उन्हें भोगना जरूर पड़ता है। अगर भूलवश आपसे कोई बुरा कर्म हो जाता है तो उसके प्रायश्चित का उपाय सेवा भाव है, इसके लिए हमें अपने बड़े बुजुर्गों गुरुजनों व संतों की सेवा करनी चाहिए। सेवा भाव मनुष्य के हर कष्ट हर पाप को हर लेता है। आज कथा सुनने के लिए भारी संख्या में श्रोताओं का हुजूम उमड़ा। कथा में कुनिहार, कोठी, हाटकोट पंचायत के काफी संख्या में भागवत प्रेमी कथा का रसपान कर रहे हैं।