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Solan News: प्री प्राइमरी व किंडरगार्टन स्कूलों को महिला एवं बाल विभाग देगा मंजूरी

Sun, 23 Aug 2026 12:40 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
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इससे पहले प्रारंभिक शिक्षा विभाग के पास लेनी होती थी अनुमति
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अब बिना पंजीकरण नहीं चल सकेंगे डे केयर व किंडरगार्टन स्कूल
विभाग की टीमें करेगी जांच, उसके बाद ही दी जाएगी परमिशन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में अब यदि क्रैच, प्ले स्कूल, डे केयर सेंटर, किंडरगार्टन, नर्सरी स्कूल और बालवाड़ी जैसे संस्थानों को खोलना है, तो उसके लिए अब महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से मंजूरी लेनी होगी। वहीं इसके लिए अब सोलन जिले में स्थापित सभी संस्थानों को ऑनलाइन माध्यम से पंजीकरण के लिए आवेदन करना भी जरूरी हो गया है। छोटे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए हिमाचल प्रदेश प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा केंद्र (पंजीकरण और विनियमन) नियम 2026 को अधिसूचित कर दिया गया है।
नियमों के अनुसार ईसीसीई केंद्रों के अंतर्गत क्रैच, प्ले स्कूल, डे केयर सेंटर, किंडरगार्टन, नर्सरी स्कूल और आंगनबाड़ी जैसे संस्थान को शामिल किया गया है। इसमें बिना पंजीकरण के कोई भी डे केयर या किंडरगार्टन स्कूल नहीं चला सकेगा। इसमें 20 बच्चों के लिए कम से कम 28 वर्ग मीटर का क्लासरूम होना जरूरी है। वहीं अगर बच्चों की संख्या 20 से अधिक है, तो प्रति अतिरिक्त बच्चा 1.4 वर्ग मीटर स्थान बढ़ाना होगा। इसके अलावा 20 बच्चों के लिए खेल का मैदान 900-1400 वर्ग फुट का होना चाहिए। जगह की कमी होने पर 600 वर्ग फुट का अतिरिक्त इनडोर खेल क्षेत्र प्रदान करना होगा। वहीं अनुकूल शौचालय, स्वच्छ पेयजल, सुरक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी, अग्नि सुरक्षा उपाय और दिव्यांग बच्चों के आने-जाने के लिए रैंप का होना भी जरूरी है। केंद्र के परिवहन में प्रति 10 बच्चों पर एक आया या परिचारक को तैनात करना होगा। नए पंजीकरण के लिए शुल्क 15 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अलावा केंद्रों को बच्चों के विकास के मूल्यांकन के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से विकसित आधारशिला राष्ट्रीय पाठ्यक्रम का पालन करना होगा। अगर कोई केंद्र नियमों का उल्लंघन करता है, तो उपायुक्त या निदेशक स्वयं संज्ञान लेकर या शिकायत मिलने पर जांच करवा सकते हैं और दोषी पाए जाने पर नियमों के तहत दंड भी लगाया जाएगा।
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कोट
जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पदम देव शर्मा ने बताया कि सभी संस्थानों को इन नियमों का पालन करना जरूरी है। कहा कि केंद्र अधिक जानकारी के लिए बाल विकास परियोजना अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। डॉ. पदम देव, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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