एक जनवरी से एपीएल परिवारों को डिपुओं में सस्ता आटा नहीं दिए जाने के केंद्र सरकार के फैसले से जिला सोलन के हजारों उपभोक्ता खफा है। केंद्र सरकार के इन फरमानों के बाद लगभग 86,833 एपीएल राशनकार्ड धारक इस सुविधा का लाभ अगले तीन माह तक नहीं उठा सकेंगे। प्रत्येक राशनकार्ड में करीब 4 से 5 सदस्य शामिल होते हैं। लिहाजा करीब चार लाख की आबादी इस फैसले से प्रभावित होगी।
गृहणियों का तर्क है कि नोटबंदी के बाद आगे ही आर्थिक परेशानी है अब एपीएल परिवारों का सस्ता आटा भी बंद कर दिया। आटा रोजमर्रा की जरूरत है। इसकी भरपाई चावल नहीं कर सकते। हिमाचल जैसे प्रदेश में जहां कम चावल की पैदावार के चलते उसका उपभोग भी कम है। केंद्र का अब आटे की जगह 13 किलो चावल प्रति परिवार दिए जाने का फैसला उन्हें मंजूर नहीं है।
प्रदेश सरकार के इस फरमान के बाद सोलन की महिलाओं में रोष है। महिलाओं का कहना है कि नोटबंदी से जहां पहले से ही किचन में सिर्फ जरूरत का सामान पहुंच पा रहा था। अब रोटी के बिना ही खाने की थाली सजानी पड़ेगी। प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार का यह फैसला हजारों एपीएल परिवारों पर भारी पड़ेगा। दुकानदारों की लाटरी लग जाएगी। लोगों को मजबूरन बाजार से आटा महंगी दरों पर खरीदना पड़ेगा।
बाजार में 25 से 45 रुपये किलो है आटा
जिला सोलन के 302 डिपुओं में एपीएल परिवारों को हर माह साढ़े आठ रुपये प्रतिकिलो की दर से 13 किलो आटा प्रति राशनकार्ड मुहैया करवाया जाता है। बाजार में आटा न्यूनतम 25 रुपये प्रति किलो से लेकर 45 रुपये किलो तक मिलता है। 45 रुपये में मल्टीग्रेन आदि आटा शामिल है।
क्या कहती हैं महिलाएं
फैसले से निराशा
सोलन की रहने वाली किरण अपना व्यवसाय चलाती हैं वह भी सरकार के इस फैसले से निराश हैं। उन्होंने कहा कि अब न चाहते हुए भी बाजार से महंगा आटा लेना पड़ेगा। इससे महीने का बजट पूरी तरह से खराब हो जाएगा। उन्होंने कहा कि डिपुओं से आटे के बदले ज्यादा चावल लेकर क्या करेंगे ?
पेटभर खाना भी नहीं होगा नसीब
नीलम कुमारी शहर के एक निजी संस्थान में पढ़ाई कर रही हैं। उनका कहना है कि इस महंगाई में पेटभर खाना भी नसीब नहीं होगा। बाजार से आटा लेना जेब पर भारी पड़ेगा। उनके मुताबिक घर से डिपो का आटा लाती थी। अब डिपुओं से चावल ज्यादा लेकर क्या चपाती बन सकती हैं।
गरीब की थाली से रोटी भी गायब
शीतल देवी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हजारों परिवारों के घरों का बजट खराब कर दिया है। सामान्य परिवार होने के चलते महंगाई से दोचार होना पड़ रहा है। सस्ता आटा एपीएल परिवारों के लिए राहत के समान था। लेकिन इसे बंद कर दिया है। आटे के बदले चावल नहीं लेंगे।
सरकार को सोचना चाहिए था
श्रुति ने बताया कि सरकार खाद्य जैसी उपयोगी वस्तुओं से आम जनता को कैसे वंचित रख सकती है। यह निर्णय लेने से पहले सरकार को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए था जो सरकार की इस योजना से लाभान्वित होते हैं। आटे की जगह ज्यादा चावल देने वाली बात समझ से परे है।
नोटबंदी का असर कम
सोलन। सोलन में नोटबंदी का असर कम हो गया है। बैंकों में भी लोगों की भीड़ सामान्य होने लगी है। शहर में एक दो निजी बैंकों के एटीएम से लोगों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। सरकारी बैंकों में बड़े नोटों सहित छोटे नोट मिल रहे हैं। कुछ एटीएम से 500 के नए नोट भी निकल रहे हैं। बड़े नोटों को तुड़वाने के लिए छोटे कारोबारियों को परेशानी हो रही है।