सरसा और कनाहन नदी के तट पर रात के स्याह अंधेरे में हो रहे अवैध खनन से माफिया मोटी कमाई कर रहा है। लोगों का कहना है कि इस पर जल्द रोक न लगी तो यहां की उपजाऊ जमीन एक दिन बंजर हो जाएगी। आलम यह है कि पहले जहां बोरवेल में पानी साठ फुट खुदाई पर आ जाता था वहीं अब तीन सौ फुट तक खुदाई करना पड़ रही है। क्षेत्र के करीब बीस प्राचीन कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं।
रात को ट्रैक्टरों और ट्रालियों में रेत तथा बजरी ढोई जा रही है। नदियों के तटों और बीच से रेत तथा बजरी निकालने से पानी का स्तर जहां गिर रहा है वहीं बरसात में यह नदियां कई बार अपना बहाव बदलकर तबाही भी मचाती हैं। न्यायालय ने खनन कार्यों पर पूरी तरह सख्ती बरतने को कहा है लेकिन इसके बावजूद यहां अवैध खनन का कार्य जमकर हो रहा है। पंचायत मंझोली के साथ लगती नदी में भी जमकर खनन हो रहा है।
कुछ लोग नदियों में जाकर अपने ट्रैक्टरों के जरिये रेत और बजरी ढो रहे हैं। इस पूरे काम को रात के अंधेरे में ही अंजाम दिया जा रहा है। खनन के कार्य पर अंकुश न लगने से नदियों के गहरे होने से मंझोली, बेरसन, मैसाटिब्बा, मगनपुरा और सैणीमाजरा के कुछ किसानों के लगभग बीस कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं। कुछ मध्यम वर्गीय किसानों ने कुओं के सूखने के बाद दोबारा अपने खेतों में ट्यूबवेल खुदवाए हैं।
किसान नंदलाल, मुकेश कुमार, हेमंत दत्ता, राज कुमार, बॉबी, मनीष और सुखविंद्र ने बताया कि जो कुएं साठ फुट गहरे थे वही पूरी तरह सूख गए हैं। उन्हें दोबारा तीन सौ फुट तक गहरा खुदवाना पड़ा। लेकिन दोबारा खुदवाए कुओं में भी पानी धीरे-धीरे घटने लगा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि साथ लगती नदियों में हो रहे माइनिंग के कार्य को बंद करवाया जाए ताकि जल स्तर का लगातार कम होना रुक सके।
नहीं रुक रहा है अवैध खनन
अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए सरकार ने कई विभागों को इसे रोकन के लिए शक्तियां प्रदान कर रखी हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर अवैध खनन नहीं रुका है। वन विभाग ने सैणीमाजरा में एक पोस्ट भी स्थापित कर रखी है। इसमें दो वन अधिकारी अपनी ड्यूटी दे रहें है लेकिन क्षेत्र इतना अधिक होने के कारण खनन बदस्तूर जारी है।
समय-समय पर होती है कार्र्रवाई : डीएसपी
डीएसपी साहिल आरोड़ा नालगढ़ ने बताया कि अवैध खनन करने वालों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है और चालान काटे जाते है। वहीं जैसे ही ऐसे मामलों में उन्हें शिकायत आती है वह तुरंत कार्रवाई करते है।