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बिना ट्रीट किए गंदा पानी छोड़ने वाले सैकड़ों उद्योगों को नोटिस

Thu, 27 Oct 2016 12:04 AM IST
ब्यूरो, सोलन
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बीबीएन में पर्यावरण के लिए जहर बन चुका उद्योगों से निकलने वाला रसायनयुक्त अनट्रिटिड पानी को मानकों के तहत साफ न करने वाले 350 उद्योगों को नोटिस जारी होंगे। हाईकोर्ट की लताड़ के बाद प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने लापरवाह उद्यमियों पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। इसके तहत चिन्हित उद्योगों को 62 करोड़ की लागत से बने केंदूवाल सीईटीपी से जुड़ने का फरमान जारी किया है।
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अमल न करने वालों पर कार्रवाई होगी। इसमें संबंधित उद्योगों के बिजली और पानी के कनेक्शन कट सकते हैं। यह फैसला केंदूवाल सीईटीपी प्लांट में प्रदूषित पानी के ट्रीटमेंट को लेकर बद्दी में आयोजित एक आपात बैठक के दौरान लिया गया। गौरतलब है कि माननीय हाईकोर्ट ने इस संबंध में प्रशासन को भी लताड़ लगाई है। कोर्ट ने केंदूवाल ट्रीटमेंट प्लांट शुरू होने के बावजूद उद्योगों से कनेक्विटी न होने पर नाराजगी जताई और जल्द रसानयुक्त पानी निकालने वाले उद्योगों को सीईटीपी में कनेक्टिविटी के निर्देश दिए।

बैठक की अध्यक्षता कोर्ट द्वारा गठित कमेटी चेयरमैन एवं बोर्ड सदस्य सचिव संजय सूद ने की। बैठक में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, बीबीएनआईए, बददी इंफ्रास्ट्रक्चर, यूपीएलईईएल, डीआईसी के अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे। इस दौरान माननीय हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप केंदूवाल स्थित सीईटीपी प्लांट की क्षमता के अनुरूप दोहन करने को लेकर रणनीति को तैयार किया गया। हाईकोर्ट द्वारा गठित इस कमेटी की ओर से पांच नवंबर की अगली सुनवाई पर प्लांट में निर्देशों के अमल करने को लेकर प्रोग्रेस रिपोर्ट को पेश किया जाता है।
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62 करोड़ से बना है सीईटीपी प्लांट
62 करोड़ के केंदूवाल सीईटीपी प्लांट में रोजाना 25 एमएलडी गंदे पानी को ट्रीट करने की क्षमता है। मौजूदा समय में इस प्लांट में केवल 15.4 एमएलडी गंदे पानी का ट्रीटमेंट हो रहा है। शेष उद्योगों से निकलने वाला पानी सीधे पर्यावरण में जहर घोल रहा है। बीबीएन में सैकड़ों यूनिट ऐसे हैं जिनसे उत्पादन के दौरान गंदा पानी निकलता है। इनमें से मात्र 72 यूनिट ही केंदूवाल में गंदे पानी की ट्रीटमेंट करवा रहे हैं। अन्य यूनिटों को भी प्लांट से जोड़ने को लेकर अब बोर्ड कार्रवाई में जुट गया है।

सेहत से लेकर पैदावार तक प्रभावित
अकसर देखा गया है कि अनट्रिटेड पानी को उद्यमी बारिश और बरसात की आड़ में सीधे नालों में फेंक रहे हैं। इसके अलावा कई उद्योग तो चोरी छिपे इस रसायन युक्त पानी को बहा देते हैं। ऐसे में यह पानी ग्राउंड वाटर में मिलकर उसे दूषित करता है। इससे पानी जहर समान हो जाता है और जलनित रोगों के अलावा कैंसर, दमा, स्किन रोग और आंखों की समस्या के अलावा तपेदिक के शिकार होते हैं। नालागढ़ के कुछ हिस्सों में तो बढ़ते कैंसर रोग को लेकर आईजीएमसी की टीम सर्वे भी कर चुकी है।
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