रामशहर में श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करते श्रद्धालु
हनुमान मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा का हो रहा आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। रामशहर के हनुमान मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन व्यासपीठ राजेश शर्मा ने भगवान कृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जब कंस के अत्याचारों से पृथ्वी दुखी हो गई, तो भगवान ने अवतार लेने का निश्चय किया। कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह वसुदेव से कर दिया था। जब वह उन्हें विदा करके ले जा रहा था, तो आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान उसका काल बनेगी।
कंस ने देवकी और वसुदेव को जेल में डाल दिया और एक-एक करके छह संतानों को मार डाला। सातवें गर्भ को योगमाया ने रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया। आठवें गर्भ में स्वयं भगवान ने अवतार लिया। तब देवकी और वसुदेव के बंधन स्वतः खुल गए। भगवान ने वसुदेव को निर्देश दिया कि बालक कृष्ण को गोकुल में नंद के घर पहुंचाओ। पहरेदार सो गए और कारागार के किवाड़ अपने आप खुल गए। वसुदेव ने बालक कृष्ण को गोकुल पहुंचा दिया और बदले में कन्या को देवकी की गोद में डाल दिया। ज्यों ही कन्या को गोद में रखा गया, जेल के दरवाजे बंद हो गए और देवकी व वसुदेव की बेड़ियां फिर से लग गईं।
25 सितंबर से शुरू हुई कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक है। 1 अक्टूबर को कथा की पूर्णाहुति होगी और उसके पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।