रायपुर में कथा श्रवण करते हुए श्रद्धालु स्रोत: आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। बद्दी उपमंडल के रायपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास पंडित प्रकाश चंद गर्गाचार्य ने परीक्षित जन्म और महाभारत के अंतिम चरण के मार्मिक प्रसंगों का वर्णन कर भक्तों को भावविभोर कर दिया। व्यासपीठ से कथा सुनाते हुए पंडित प्रकाश चंद ने कहा कि जब महाभारत का युद्ध समाप्त होने वाला था, तब अश्वत्थामा ने प्रतिशोध में द्रौपदी के पांच पुत्रों की सोते समय हत्या कर दी थी। इतना ही नहीं, पांडवों के वंश को समाप्त करने के लिए अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु पर ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया था। उस समय भगवान श्री कृष्ण ने अपनी माया से उत्तरा के गर्भ में प्रवेश कर राजा परीक्षित की रक्षा की और उन्हें पुनः जीवनदान दिया। कथा में आगे बताया गया कि पांडवों ने अपना राज्य पौत्र परीक्षित को सौंपकर वन प्रस्थान किया। राजा परीक्षित के शासनकाल में कलयुग का प्रभाव बढ़ा, जिसके चलते अनजाने में उन्होंने शामिक ऋषि के गले में मृत सांप डाल दिया। इस अपमान से क्रोधित होकर ऋषि के पुत्र श्रृंगी ने राजा को श्राप दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक नाग के डसने से उनकी मृत्यु हो जाएगी। इसी श्राप की मुक्ति के लिए राजा परीक्षित ने शुकदेव मुनि से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया।