क्षेत्रीय अस्पताल में सुविधा न होने से मरीजों को खर्च करने पड़ रहे हजारों रुपये
निजी अस्पतालों में टेस्ट के लिए 2500 से 12 हजार तक देने को मजबूर हैं लोग
मशीन लगने पर सरकारी दरों पर टेस्ट होने से रोगियों की जेब पर कम पड़ेगा बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। परवाणू-शिमला बाइपास पर कथेड़ में बन रहे मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं वाली मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) मशीन की सुविधा मिलने वाली है। इसके लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है। इसे आने वाले समय में मरीजों को एमआरआई के टेस्ट करवाने के लिए निजी अस्पतालों की ओर नहीं जाना पड़ेगा। मरीजों को एक ही स्थान पर इसकी सुविधा मिल पाएगी। अभी के समय में क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में लोगों को एमआरआई मशीन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस कारण मरीजों को अकसर निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ रहा है। अन्य सरकारी संस्थानों में एमआरआई टेस्ट 2 से 6 हजार रुपये तक के हो जाते हैं। वहीं निजी अस्पतालों में इसके टेस्ट 2500 से 12 हजार रुपये तक होते हैं। सोलन अस्पताल में यह मशीन न होने के कारण मरीजों को लगभग दोगुने दामों पर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। कथेड़ अस्पताल में आधुनिक एमआरआई मशीन लगने से सरकारी दरों पर टेस्ट हो पाएंगे और रोगियों की जेब का बोझ भी कम होगा। इसके लिए क्षेत्रीय अस्पताल सोलन प्रशासन की ओर स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है और जल्द ही अस्पताल को यह मशीन मिलने की उम्मीद है। हालांकि सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही मशीन के बजट का प्रावधान किया जाएगा और उसके बाद ही यह फैसला होगा कि कौन सी एमआरआई मशीन अस्पताल में लगाई जाएगी। वहीं कथेड़ में बन रहे अस्पताल का काम भी लगभग पूरा होने वाला है। काम पूरा होने के बाद अस्पताल को शिफ्ट करने का काम भी शुरू हो जाएगा। मां शूलिनी मेले तक इसका काम पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है।
पहले भी भेजा जा चुका है प्रस्ताव
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में एमआरआई मशीन लगाने के लिए पहले भी सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। इसके बावजूद यहां मरीजों को इसकी सुविधा नहीं मिल पाई। अब कथेड़ में बन रहे क्षेत्रीय अस्पताल में एमआरआई मशीन लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
मंजूरी मिलते ही खरीदी जाएगी मशीन
अभी क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में एमआरआई मशीन नहीं है, लेकिन कथेड में बन रहे नए क्षेत्रीय अस्पताल में मशीन लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को प्रस्ताव भेजा है। सरकार की ओर से मंजूरी मिलने के बाद मशीन खरीदने की तैयारी भी शुरू हो जाएगी। इससे मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा और एक ही स्थान पर टैस्ट हो पाएंगे।
- डॉ. राकेश पंवार,चिकित्सा अधीक्षक, क्षेत्रीय अस्पताल,सोलन