कथा के अंतिम दिन सुनाया रुक्मिणी
विवाह, परीक्षित मोक्ष का प्रसंग
बसोट गांव में पूर्णाहुति के साथ श्रीमद्भागवत का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। बसोट गांव में श्रीमद्भागवत कथा का हवन व पूर्णाहुति के साथ समापन किया गया। सुबह हवन यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें यजमान प्रकाश सैनी और उनके परिवार सहित अन्य श्रद्धालुओं ने आहुति डाली।
आचार्य भगवान दास शास्त्री ने बताया कि कंस वध का समाचार सुनकर उसका ससुर जरासंध क्रोधित हो गया। उसने मथुरा पर चढ़ाई कर दी। यद्यपि उसे मुंहकी खानी पड़ी, किंतु उसने छापामार युद्ध शुरू कर दिया। इससे व्यथित होकर श्रीकृष्ण अपनी प्रजा के साथ मथुरा छोड़कर द्वारिका चले गए।
इसके बाद रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने अपनी बहन का विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था, किंतु रुक्मिणी मन से श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकी थीं। इसलिए उन्होंने श्रीकृष्ण को संदेश भिजवाया, जिसे पाकर श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर उन्हें द्वारिका ले जाकर विवाह किया। पूर्व विधायक केएल ठाकुर ने भी कथा का श्रवण किया। कथा के उपरांत यजमान प्रकाश सैनी और उनके परिजनों ने भगवान की आरती उतारी तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया।