उपमंडल नालागढ़ के किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान करने वाली राज कूहल लगातार हो रहे अवैध खनन और विभाग की अनदेखी का शिकार हो रही है। सरसा नदी में लगातार खनन से नदी का जल स्तर भी काफी नीचे चला गया है। इससे कुओं का पानी बहुत नीचे जिससे नदी पर लाखों रुपये से बांध बनाया जाता है लेकिन जैसे ही बारिश आती है। बांध जल के बहाव में बह जाता है। इसे दोबारा खड़ा करने में लाखों रुपये व्यय होते हैं। समय पर बांध तैयार न होने से किसानों की फसलें खराब हो रही हैं।
पांच दशक पूर्व उपमंडल के किशनपुरा, मानपुरा, सनेड़, खेड़ा, किरपालपुर और राजपुरा के सैकड़ों किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए सरकार ने राज कूहल का निर्माण किया था। इस कूहल के बनने से क्षेत्र के करीबन पांच हजार बीघा जमीन सिंचित हुई थी। यहां की जमीन उपजाऊ हो गई थी। किसानों ने गेहूं और धान लगाना शुरू कर दिया था। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी काफी मजबूत हो गई थी। प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां पर संसाधनों का अत्यधिक धोहन हुआ। नदी नालों से अवैध खनन होने से जल स्तर काफी नीचे चला गया।
जल स्तर नीचे जाने से आ रही दिक्कत
दशकों पहले जब यह कूहल बनाई थी तो नदी का जल स्तर इतना ऊपर था कि स्वयं ही पानी कूहल में चला जाता था लेकिन वर्तमान में जल स्तर काफी नीचे चला गया। इससे यहां पर अब हर वर्ष आईपीएच विभाग बांध बनाता है जिस पर लाखों रुपये व्यय होता है लेकिन जैसे ही नदी में बारिश होने से पानी आता है तो यह बांध बह जाता है। समय पर बांध न लगने से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं। समय पर सिंचाई न होने से गेहूं की फसल समय पर नहीं लग रही है।
किसानों को पहले जैसा नहीं मिल रहा लाभ
सिंचाई के अभाव में पचास फीसदी उत्पादन गिर गया है। खेड़ा पंचायत के प्रधान अवतार सैणी, नंदलाल, अजय कुमार, रणजीत सिंह, रामकरण, मूलचंद, किरपालपुर के प्रीतम सिंह, मनसा राम, श्याम लाल, किशनपुरा के जयपाल, बलजीत सिंह और सनेड़ के जीत राम ने बताया कि इस कूहल से किसानों को पहले बहुत फायदा होता था। लेकिन अब समय पर न तो कूहल तैयार होती है और कहीं से मलबा आने से बंद हो जाती है। कई दिन तक यह चालू नहीं होती है। खेड़ा के पास साइफन खराब होने से सिंचाई सुविधा प्रभावित हो रही है। अब पहले से आधा पानी ही कूहल में आ रहा है। ठेकेदार कूहल का मलबा निकालकर इसको साथ ही जमा कर देते हैं जो बारिश के पानी के साथ वापस कूहल में मिल जाता है। अब यहां पर किसान धान और गेहूं की फसलें कम लगाते हैं।
छोटे किसान अभी भी आश्रित
किसान अवतार सिंह, नंदलाल और प्यारा ने बताया कि किशनपुरा से राजपुरा तक पचास से अधिक किसानों ने अपने ट्यूबवेल लगा लिए हैं। लेकिन 70 फीसदी किसान अभी भी इसी कूहल पर निर्भर हैं। छोटे किसानों के पास इस कूहल के अलावा बारिश ही एक सहारा है जिसका कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
बांध बनाने में लगते हैं लाखों रुपये
विभाग के सहायक अभियंता मनीष शर्मा ने माना कि खनन होने से अब हर वर्ष बांध बनाना पड़ रहा है। इससे प्रतिवर्ष लाखों रुपये का व्यय हो रहा है। ठेकेदार समय-समय पर कूहल की मुरम्मत और अन्य कार्य करता है। नदी में पानी की कमी होने और जल स्तर नीचे होने से कई बार किसानों को दिक्कतें आ रही हैं। विभाग का प्रयास रहता है कि किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा मिले।