शिव तांडव स्तोत्र की श्लोक सहित व्याख्या कर बताई गई
कुनिहार में शिव कांवड़ सेवा समिति हाटकोट करवा रही कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। शिव कांवड़ सेवा समिति हाटकोट कुनिहार में आयोजित शिव महापुराण कथा में सुप्रसिद्ध कथा व्यास एवं राष्ट्रीय प्रचारक गो सेवा दल शशांक कौशल ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की महिमा से जुड़े धार्मिक और आध्यात्मिक प्रसंगों का श्रवण करवाया। कथा के दौरान 12 ज्योतिर्लिंगों की महिमा महाशिवरात्रि व्रत की विधि शिव सहस्रनाम स्तोत्र और शिव तांडव स्तोत्र के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
कथा व्यास शशांक कौशल ने सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वर और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंगों की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ज्योतिर्लिंगों का स्मरण और भगवान शिव की आराधना मनुष्य को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है। भगवान शिव त्याग तपस्या करुणा और कल्याण के प्रतीक हैं। उन्होंने शिव तांडव स्तोत्र की श्लोक सहित व्याख्या करते हुए कहा कि इसमें भगवान शिव के रौद्र तेजस्वी और दिव्य स्वरूप का वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की जटाओं से प्रवाहित मां गंगा पवित्रता और जीवन का प्रतीक हैं। शिव का तांडव सृष्टि की ऊर्जा गति और परिवर्तन का प्रतीक है। उन्होंने भगवान शिव की जटाओं, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, गले में सर्प और डमरू के आध्यात्मिक महत्व को भी श्रद्धालुओं को समझाया।
उन्होंने ने महाशिवरात्रि व्रत की विधि बताते हुए उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को प्रातः स्नान कर संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव का जल दूध और पंचामृत से अभिषेक कर बेलपत्र पुष्प और फल अर्पित करने चाहिए। चारों प्रहर शिव पूजन मंत्र जाप और रात्रि जागरण का विशेष महत्व बताया। शिव सहस्रनाम स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक स्मरण मन को शांति प्रदान करता है। और व्यक्ति को सत्य संयम व सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कथा आयोजक विनोद भारद्वाज और राधा रमण शर्मा ने बताया कि कांवड़ लेकर लौट रहे कांवड़ियों का कुनिहार पहुंचने पर शाम छह बजे ढोल नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया जाएगा। रात को राजदरबार परिसर में भजन संध्या आयोजित होगी। साथ ही मंगलवार सुबह सभी कांवड़ियों के साथ कुनिहार के विभिन्न शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा।