बरोटीवाला (सोलन)। दून के पहाड़ी क्षेत्र में बंद पड़ी चार पेयजल योजनाओं को विभाग की सूझबूझ से उनका जलस्रोत रिचार्ज किया गया। खड्डों में पानी आने से पांच दिन बाद पानी मिलने वाले गांव में अब हर रोज पानी मिलने लगा है। इससे 20 गांवों की पांच हजार की आबादी को पेयजल किल्लत दूर हुई है। दून के पहाड़ी क्षेत्र की पट्टा बाडियां व भावगुड़ी पंचायतों में साथ लगती खड्डों से पानी उठाकर गांव के सप्लाई की जाती है। पट्टा खड़्ड से पट्टाताल उठाऊ योजना, नायड खड्ड से भावगुड़ी और कोट बेजा खड्ड से कोटला व कावटा उठाऊ योजनाएं बनाई गई है। गर्मियां शुरू होते ही इन खड्डों में पानी सूख गया। विभाग के सुपरवाइजर ईश्वर चंद ने अपने उच्च अधिकारियों को इन योजना को चालू रखने के लिए खड्ड में गहरे गड्ढे करने की योजना बताई। जिस पर विभाग ने जेसीबी से इन तीनों खड्डों में 10 फीट गहरे व 20 फीट चौड़े गड्ढे किए। इससे इन गड्ढों में पानी भर गया और और अब इन पेयजल योजनाओं में पानी की कोई कमी नहीं है। पट्टा ताल व भावगुड़ी योजनाओं का तहत पांच दिन के बाद पानी लोगों को मिल रहा था, लेकिन इस तकनीक से अब 14 गांवों के लोगों को दूसरे दिन पानी मिल रहा है। वहीं कावटा व कोटला योजनाओं में इतना पानी आ गया है कि इस योजना के तहत 6 गांवों को हर रोज पानी मिल रहा है। विभाग की इस तकनीक से 20 गांवों के पांच हजार की आबादी को पेयजल किल्लत दूर हुई है।
मवेशियों को भी मिल पाएगा पर्याप्त
भावगुड़ी पंचायत की प्रधान दुर्गावती, पट्टा ताल के पूर्व प्रधान बलदेव सिंह, कोटला के राजेंद्र सिंह ने बताया कि दून के पहाड़ी क्षेत्र की इन खड्डों में पानी एक माह पहले सूख गया था, लेकिन विभाग की इस नई सोच व तकनीक से लोगों को गर्मियों में पानी की कमी नहीं होगी। साथ ही मवेशियों को भी पर्याप्त पानी मिलेगा।
उधर, जलशक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता राहुल अबरोल ने बताया कि विभाग ने खड्डों में पानी सूखने के बाद वैकल्पिक प्रयोग किया जो सफल रहा। यहां पर भारी वेट से सिंक करके आर्टिफिशियल कुआं बनाने की योजना है उसके लिए उन्होंने एस्टीमेंट बनाकर उच्च अधिकारियों को प्रपोजल भेजी है। बजट आने के बाद इस पर काम किया जाएगा। अगर जेकवैल लगता है तो इन योजना को चालू रखने के लिए स्थायी समाधान होगा।
बायनाड खड्ड में गड्ढा बनाने का बाद आया पानी। संवाद