एसडीएम सोलन को ई20 पेट्रोल को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए। स्रोत : प्रतिनिधिमंडल
एसडीएम के माध्यम प्रधानमंत्री-केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री को भेजा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की सोलन लोकल कमेटी ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री को ज्ञापन भेजा। इसमें ई-20 पेट्रोल नीति की व्यापक समीक्षा की मांग की गई है। पार्टी ने पेट्रोल की कीमतों में कमी और शुद्ध एथेनॉल-मुक्त पेट्रोल उपलब्ध कराने को भी कहा।
ज्ञापन में एथेनॉल उत्पादन के जल और पर्यावरणीय प्रभावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच की मांग उठाई गई। पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि लाखों वाहन ई20 ईंधन के लिए नहीं बने हैं। ऐसे वाहन मालिकों को इंजन की कार्यक्षमता और पुर्जों पर पड़ने वाले प्रभावों की चिंता है। अनेक चालकों ने ईंधन दक्षता में कमी और रखरखाव लागत बढ़ने की शिकायतें की हैं। हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में यह विषय अधिक महत्वपूर्ण है। यहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में वाहनों का संचालन होता है। ईंधन गुणवत्ता में बदलाव से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। सीपीआईएम के सचिव राकेश कुमार ने कहा कि सरकार ने आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के लिए यह नीति पेश की थी।
सीपीआईएम का तर्क है कि यदि नीति से सरकार और तेल कंपनियों को आर्थिक लाभ मिल रहा है, तो उसका लाभ जनता तक भी पहुंचना चाहिए। पेट्रोल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसलिए सरकार को पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए करों की समीक्षा करनी चाहिए। इससे पेट्रोल की कीमतों में कमी आएगी और महंगाई से जूझ रही जनता को राहत मिलेगी। प्रतिनिधिमंडल ने सभी पेट्रोल पंपों पर ई20 के साथ शुद्ध या कम एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग की।
ज्ञापन में एथेनॉल उत्पादन के पर्यावरणीय प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। इसके लिए गन्ना, मक्का जैसी फसलों के बड़े पैमाने पर उपयोग से भारी मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। भारत पहले से ही भूजल दोहन और जल संकट का सामना कर रहा है। सीपीआईएम ने ई20 नीति के तकनीकी, आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों की समीक्षा आईआईटी, आईआईएससी, एआरएआई और स्वतंत्र विशेषज्ञों से कराने की मांग की। पार्टी ने ई20 से वाहन क्षति पर सरकार और तेल कंपनियों से पूर्ण क्षतिपूर्ति मांगी।