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कुनिहार पहुंचा बांग्लादेश का गुब्बारा

Sat, 08 Oct 2016 09:38 PM IST
ब्यूरो, अरकी सोलन
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कुन‌िहार में म‌िला बांग्लादेश का गुब्बारा द‌िखाते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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एक बार फिर संदिग्ध गुब्बारों ने अर्की और कुनिहार क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। शनिवार को पलोग (मांजू) पंचायत के हटनाली गांव में बंगलादेश के बैनर के साथ गुब्बारे का गुच्छा मिला है। हालांकि इस बैनर में भी किसी के बारे में कोई  टिप्पणी नहीं की थी। बल्कि उसमें बांग्लादेश के ढाका शहर में किसी स्पोर्ट्स पार्क के उद्घाटन के बारे में लिखा था। पुलिस ने सूचना मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। हाल ही में अर्की के एक गांव में भी गुब्बारे मिलने से सनसनी फैली थी। पुलिस के मुताबिक शनिवार सुबह स्थानीय महिला कमलेश अपनी सास के साथ घासनी में घास काटने पहुंची तो उन्हें वहां खैर के पौधे पर बहुत सारे गुब्बारे लटके हुए दिखे। जब वह उसके पास पहुंची तो उसमें एक छोटा सा बैनर लटका हुआ मिला। इसकी जानकारी तुरंत पंचायत प्रधान योगेश चौहान को दी।
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मामले की हो रही जांच

अर्की थाना प्रभारी हरी भगत नेगी ने कहा कि इस मामले में जांच की जा रही है। संभावना जताई कि ऐसा भी हो सकता है कि किसी बड़े गुब्बारे के साथ यह गुब्बारे बांधे गए हों और उड़ते हुए वह बड़ा गुब्बारा कहीं फट गया हो और ये गुब्बारे यहां पहुंच गए हों।

छह मील आसमानी सफर
ही तय कर सकते हैं गुब्बारे
आखिर कौन छोड़ रहा पड़ोसी मुल्कों के गुब्बारे
एरोनोटिकल गुब्बारे का अधिकतम 32 मील सफर
अमर उजाला ब्यूरो
अर्की/कुनिहार (सोलन)।
 अर्की उपमंडल में संदिग्ध गुब्बारे मिलने का सिलसिला नहीं थम रहा। करौली गांव के बाद अब पलोग में मिले गुब्बारों के चलते चर्चा का माहौल गरमाया हुआ है। सरहद पर तनाव के माहौल को लोग इन गुब्बारों से जोड़ रहे हैं। उधर प्रश्न उठ रहा है कि आखिर कभी उर्दू और कभी बंगलादेश के गुब्बारे कौन छोड़ रहा है। उधर विशेषज्ञों का मानना है कि हीलियम गैस से भरा एक साधारण गुब्बारा अधिकतम 6 मील का आसमानी सफर तय कर सकता है।
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  तर्क दिया जा रहा है कि गुब्बारे की स्किन हवा के दबाव को झेलने के लिए दक्ष नहीं होती। एरानोनिटकल संस्थान द्वारा तैयार गुब्बारे 32 मील तक का सफर तय कर सकते हैं। स्थानीय निवासी अमर सिंह ने कहा कि ढाका से इतने छोटे-छोटे गुब्बारे उनके गांव में कैसे पहुंच सकते हैं? लोगों में लगभग यही उत्सुकता बनी रही कि कहीं कोई शरारत तो नहीं कर रहा है। कुछ दिन पहले ही बलेरा पंचायत के करौली गांव में ग्रामीणों को दो संदिग्ध गुबारे मिल थे जिसमें साथ में उर्दू के पत्र भी लिखा था।
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