संघोई धार में जूस पिलाकर आंदोलन स्थगित करते जनप्रतिनिधि।
पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा ने प्रदर्शनकारियों को जूस पिलाकर किया आंदोलन किया स्थगित
ग्रामीणों बोले, डीजीएमएस रिपोर्ट में अवैध खनन और ब्लास्टिंग की हुई पुष्टि
संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट (सोलन)। संघोई धार क्षेत्र में बीते 125 दिनों से चल रहा ग्रामीणों का शांतिपूर्ण धरना और क्रमिक भूख हड़ताल फिलहाल अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई है। पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा और पूर्व जिला परिषद सदस्य आशा परिहार ने प्रदर्शनकारियों को जूस पिलाकर आंदोलन को अगली रणनीति तक रोकने की घोषणा की। ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में आई डीजीएमएस की जांच रिपोर्ट में उनके आरोप सही पाए गए हैं। रिपोर्ट में संघोई धार, मांगू और कश्लोग क्षेत्रों में रात्रिकालीन खनन और भारी ब्लास्टिंग की पुष्टि हुई है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा ने कहा कि रिपोर्ट से कंपनी की कथित गैरकानूनी गतिविधियां और प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस तरह की गतिविधियां दोहराई गईं, तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन से रात्रिकालीन खनन पर रोक और संवेदनशील क्षेत्रों में ब्लास्टिंग बंद करने की मांग की। पूर्व जिला परिषद सदस्य आशा परिहार ने 125 दिनों तक संघर्ष करने वाले ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों के साहस की सराहना करते हुए इसे उनकी जीत बताया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीण एकजुट रहे और अपनी आवाज बुलंद रखी। प्रभावित महिलाओं विमला देवी और महंतु देवी ने आरोप लगाया कि कंपनी वर्षों से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और कई स्थानों पर बिना सहमति खनन किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी स्थिति दोबारा बनी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। समिति अध्यक्ष धीरज ठाकुर ने बताया कि डीजीएमएस रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी गई है और कार्रवाई का आश्वासन मिला है। समिति सचिव देवेंद्र सिंह ने कंपनी पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में प्रदूषण, पानी की कमी, घरों में दरारें और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं गंभीर बनी हुई हैं। कानूनी सलाहकार रजनीश शर्मा ने झूठे मुकदमों की वापसी और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि फिलहाल स्थगित किया गया है। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।