उमंग कल्चरल एंड वेलफेयर सोसायटी सोलन के तत्वाधान में भाषा कला एवं संस्कृति विभाग तथा गेयटी थियेटर शिमला के सौजन्य से बुधवार शाम 6 बजे, मेरा नाम राधा है, का मंचन किया गया। यह नाटक सादत हसन मंटो द्वारा लिखित कहानी मेरा नाम राधा है पर आधारित था। कहानी तीन किरदारों के आसपास घूमती है। नाटक में अपने आपसी अंतर्द्वंद्व के माध्यम से गति देते हैं। नीलम नाटक की नायिका शहर में अभिनेत्री बनने का सपना लिए आती है।
मंटो जोकि नीलम को पहले से ही जानता है, नीलम के साथ रहते-रहते उसका स्नेह नीलम के लिए बढ़ जाता है। वो उसकी आंतरिक सुंदरता का कायल हो जाता है। इसके बाद नीलम के जीवन में राज किशोर आता है। वह उस जमाने का मशहूर अभिनेता होता है। दोनों में संबंध बनते हैं। राजकिशोर नीलम को अपनी मीठी मीठी बातों में फंसाकर उसका शारीरिक और मानसिक शोषण करता है। उसे राजकिशोर की असलियत का पता तब चलता है जब राजकिशोर उसे अपमानित करने के लिए अपनी बहन बनने को कहता है और उससे राखी तक बांधने को मजबूर कर देता है।
राजकिशोर की ऐसी हरकत से नीलम की भावना को बहुत ठेस पहुंचती है और वो अपना मानसिक संतुलन खो बैठती है। नीलम संभलती है और राजकिशोर को सबक सिखाने की सोचती है। इसके बाद वह मंटो के साथ मिलकर राजकिशोर के खिलाफ सुबूत एकत्र करके उसे जेल भिजवाती है। नीलम का पात्र अंबिका कमल, मंटो का किरदार चमन बंसल और राजकिशोर का किरदार संजय कुमार ने निभाया। नाटक का निर्देशन भी इन्हीं कलाकारों ने किया। नाटक में मुकेश उपाध्याय, सुरेंद्र पाल, प्रीतिका कमल, गुनदीप सिंह कपूर, सन्नी, रामप्रकाश लीना, सुशील वैभव, कुनाल और ओशो ने अभिनय किया।