सोलन। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्राध्यापक संघ ने प्रदेश सरकार की ओर से शिक्षा विभाग पर किए जा रहे नए-नए प्रयोगों पर आपत्ति जताई है। शिक्षकों के तबादले सॉफ्टवेयर से करने की सूचनाएं सुर्खियां बटोर रही हैं। इस निर्णय से शिक्षकों के मन में अजीब उलझन और खौफ देखने को मिल रहा है। पूरे प्रदेश में कार्यरत करीब 80 हजार शिक्षकों में अनिश्चितता का वातावरण है।
किस जोन में तबादला होगा, कौन सा स्टेशन मिलेगा, यह अनिश्चितता न तो अध्यापकों के हित में है और न ही विद्यार्थियों के। सॉफ्टवेयर न तो मानवीय संवेदनाएं देखता है और न ही व्यक्तिगत एवं पारिवारिक समस्याएं। इन्हें जन प्रतिनिधियों के माध्यम से ही सरकार तक पहुंचाया जाता है।
प्राध्यापक संघ के राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. प्रदीप शर्मा, राज्य कानूनी सलाहकार डॉ. एसके शर्मा, प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारी डॉ. रणजीत वर्मा, रजनीश राणा, राम कुमार पराशर, संघ के जिलाध्यक्ष चंद्रदेव ठाकुर, महासचिव विनोद चौहान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुनीश कमल, वित्त सचिव सुशील शर्मा, राजेश शर्मा, कमल वर्मा, संजीव कौशल, हंसराज, भगत राम, मनोज शर्मा, भूपेश गुलेरिया आदि पदाधिकारियों ने एक संयुक्त बयान में प्रदेश सरकार से तबादला नीति में परिवर्तन करने से पहले शिक्षकों, संगठनों को विश्वास में लेने का आग्रह किया है।
शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों से सरकार सुझाव आमंत्रित करे ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या आने से बचा जाए। यदि प्रदेश सरकार तबादलों को लेकर आ रहे शिक्षकों से परेशान हैं तो एक स्टेशन पर न्यूनतम ठहराव तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया जाए।