एक्सरे करवाने के लिए भी मरीजों को जाना पड़ रहा 20 से 25 किमी दूर
हार्ट अटैक मरीजों को ईसीजी की सुविधा नहीं, अन्य टेस्ट भी नहीं हो रहे
80 से 90 हजार की आबादी के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं बनी हुई है बेहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) का दर्जा बढ़ाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तो कर दिया गया है, लेकिन यहां अब तक डॉक्टरों और मशीनों की कमी दूर नहीं हो पाई है। ऐसे में मरीजों को जांच करवाने के लिए 20 से 25 किलोमीटर दूर दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। वहीं, निजी क्लीनिकों में एक्सरे करवाने के लिए 300 से 400 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने पट्टा महलोग, लाहोरघाट, दिग्गल और बरोटीवाला के अस्पतालों को पीएचसी से सीएचसी का दर्जा दिया है। इसके बावजूद यहां सुविधाएं अब भी पीएचसी स्तर की ही हैं। अस्पतालों में न तो एक्सरे मशीनें उपलब्ध हैं और न ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। यहां तक कि हार्ट अटैक जैसी आपात स्थिति में जरूरी ईसीजी जांच की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।
डॉक्टर की ओर से जांच लिखे जाने पर मरीजों को दूसरे अस्पतालों तक जाना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए निजी क्लीनिकों में जांच करवाना अतिरिक्त बोझ बन रहा है। ऐसे में अस्पतालों का दर्जा बढ़ने के बावजूद लोगों को अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
पट्टा महलोग अस्पताल में पहले ईसीजी मशीन थी, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी के कारण यह भी खराब हो गई। इन चारों अस्पतालों पर निर्भर करीब 80 से 90 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझना पड़ रहा है।
अस्पतालों में डॉक्टरों और मशीनों की कमी दूर करने के लिए सरकार को अवगत करवाया गया है। अब अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होने लगी है। आने वाले समय में और डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी। मशीनों की कमी पूरी करने के लिए भी विभाग प्रयास कर रहा है।
-अजय पाठक, सीएमओ