स्वास्थ्य विभाग का शोध में खुलासा, खेल न होने से नशे की गिरफ्त में आ रहे युवा
महकमे ने विभिन्न जिलों के गांव में जाकर लोगों से पूछा था कारण
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। प्रदेश के सरकारी स्कूलों के मैदान चार बजे के बाद खुले रहने पर खेलकूद गतिविधियां बढ़ी हैं। इससे विद्यार्थियों समेत अन्य युवाओं का भी सर्वांगीण विकास हो रहा है। साथ ही उनका ध्यान नशे की तरफ से भी हट रहा है। इसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई रिसर्च में हुआ है। शोध में यह भी पता लग पाया है कि स्कूलों के मैदानों के खुलने से युवा पीढ़ी मैदानों में कई प्रकार की खेल गतिविधियों में भाग ले रही है। इससे पहले चार बजे के बाद स्कूल मैदानों में ताला लटक जाता था। इससे युवाओं को खेल गतिविधियों की बजाए ध्यान नशा समेत अन्य प्रवृति की तरफ बढ़ रहा था।
जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके सिंह और अन्य चिकित्सकों ने नशे की बढ़ती प्रवृति को लेकर शोधा किया था। अनुसंधान में इस बात का पता लगाया गया कि युवा क्यों तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। इसे लेकर एक प्रश्र पत्र भी तैयार किया गया था। इसके अनुसार प्रदेश के अलग-अलग गांव में जाकर स्थानीय लोगों से डाटा एकत्र किया। इसमें खुलासा हुआ कि चार बजे के बाद सरकारी स्कूलों के अधिकतर मैदानों में पार्किंग बन जाती है। इसे लेकर युवा खेलने की बजाए वहां बैठकर नशे की लत में आ रहे हैं। वहीं कई स्कूलों के पास खेल गतिविधियों को लेकर कोई भी मैदान नहीं है। इसे लेकर युवा यहां खेलकूद गतिविधियों में भाग ही नहीं ले पाते हैं। यह सारा डाटा एकत्र करने के बाद सरकार को भेजा गया। रिसर्च के आंकड़े सरकार के पास पहुंचने के बाद तुरंत इस पर कार्रवाई अमल में लाई और स्कूलों के मैदानों को चार बजे के बाद भी खुले रखने के आदेश जारी किए। स्कूल मैदानों के खुलने के बाद फिर व्यवस्था को जांचा गया। इसमें आया कि अब युवाओं के पास कुछ-न-कुछ गतिविधि करने के लिए खेल मैदान है। इससे वह नशे की गिरफ्त से भी दूर होंगे। उधर, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और बीएमओ सायरी ने बताया कि खेल गतिविधियों के बाद विद्यार्थियों और युवाओं को कुछ करने का मौका मिला है। रिसर्च का पॉजिटिव रिस्पोंस आया है।
इनसेट
स्कूल मैदानों में अवैध पार्किंग
वर्तमान में कई स्कूलों के मैदानों को दिन में भी पार्किंग का अड्डा बनाया हुआ है। यहां पर दिन में भी अब कोई खेलकूद गतिविधि नहीं हो पाती है। इससे युवा खेलकूद से मायूस रह रहे हैं। कई स्कूल जिले में ऐसे देखे जा सकते हैं जहां पर दिन में या तो अध्यापकों के वाहन खड़े रहते हैं या स्थानीय लोग पार्किंग कर चले जाते हैं।