बीबीएन में सैकड़ों किसानों के खेतों में लहरा रही सरसों की फसल पर तेला रोग (सूंडी) का प्रकोप बढ़ गया है। बारिश के अभाव में पहले ही इस वर्ष फसल कम है और तेला (एपिड) ने किसानों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। यहां सैकड़ों बीघा जमीन पर सरसों की फसल होती है।
बीबीएन के राजपुरा, डेरोवाल, लखनपुरा झीड़ा, खेड़ा, मखनू माजरा, मलपुर और मानपुरा पंचायतों में तेला रोग ने सरसों के खेत नष्ट कर दिए हैं। यह तापमान के अधिक और कम होने से फसल पर असर करता है। पहले पत्तों का रस चूसता है उसके बाद फली को भी चूसना शुरू कर देता है। इससे पौधे सूख जाते हैं और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
किसान अवतार सैणी, देवराज ठाकुर, देवराज चौधरी, गुरदेव चंदेल, जगदेव सिंह, दलीप चंद, राम सिंह सैणी, करनैल सैणी, संजीव ठाकुर, बौणी से हरभजन सिंह, मधाला से माधो राम मेहता ने बताया कि उनके सरसों के खेत में तेला का प्रकोप बढ़ गया है। इससे फसल बर्बाद हो गई है।
क्या है तेला
यह एक हरे रंग का कीड़े हैं। हवा के साथ एक पौधे से दूसरे में फैलता है। यह पहले पते के रस चूसता है उसके बाद पौधे के तने का रस चूसना शुरू कर देता है जिससे पौधा सूख जाता है।
उपचार करना जरूरी : डॉ. गौतम
कृषि विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. यादव किशोर गौतम ने बताया कि तापमान के कम और अधिक होने से यह रोग पौधे में लगता है। इसका उपचार नहीं किया जाता है तो वह पौधों को समाप्त कर देता है।
ऐसे करें उपाय
साइपर मेथरीन दो सौ एमएल और ईमीडाक्लोफरीड पचास एमएल प्रति एकड़ दो सौ लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। एक एकड़ जमीन पर कम से कम दस पंप दवाई डालें। हर पंप में सेंडोविट 20 एमएल डालना न भूलें। 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव करें। इससे काफी हद तक तेला रोग से फायदा मिलेगा।