मुरारी मार्केट में हिमाचल नरहरि सेवा समिति के माध्यम से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रेष्ठ कार्य के लिए तीन लोगों को सम्मानित किया।
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मुरारी मार्केट में हिमाचल नरहरि सेवा समिति के माध्यम से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रेष्ठ कार्य के लिए तीन लोगों को सम्मानित किया। इनमें पंडित मदन शास्त्री को निर्धन कन्याओं के विवाह करवाने और ओमप्रकाश शास्त्री को कर्मकांड तथा ज्योतिष, नन्हीं बच्ची ट्विंकल को बेहतरीन कार्य के लिए सम्मानित किया।
व्यास आसन पर विराजमान आचार्य कमलकांत ने बताया कि भारत वर्ष को पहले अजनाभ वर्ष कहा जाता था। ऋषभ देव के पुत्र भरत के नाम इस देश का नाम भारत वर्ष पड़ा। हर स्थिति में उस परब्रह्म परमेश्वर को याद रखना चाहिए। नर्कों की गतियों का विशेष वर्णन करते हुए बताया कि जीव को उसके कर्मों के अनुसार ऊंचनीच गतियां प्राप्त होती हैं। इसलिए मनुष्य को सदा सर्वदा शुभ कर्म करने चाहिए। अजामिल की कथा का सुंदर वर्णन किया और नाम की महिमा का बखान किया। कहा कि भगवान तो आज भी प्रकट होते हैं लेकिन भाव और विश्वास प्रहलाद जी जैसा सच्चा तथा पक्का होना चाहिए। गजेंद्र मोक्ष की कथा के माध्यम से समझाया कि कभी भी जीव को अभिमान नहीं करना चाहिए क्योंकि वह पतन का कारण होता है। कथा के पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने आरती के बाद भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।