गत्ता उद्योग संघ के अध्यक्ष गगन कपूर ने कहा कि गत्ता कीमतों को एक समान रखने के लिए जल्द साफ्टवेयर तैयार किया जाएग। इससे सभी उत्पादक एक समान लागत में माल तैयार करने की जानकारी ले सकेंगे। बद्दी में संघ के आयोजित वार्षिक समारोह में उन्होंने कहा कि इस साफ्टवेयर में प्लांट व मशीनरी के अपग्रेडेशन का भी डाटा होगा। नवीन तकनीक से अगर एक गत्ता उद्योग जुड़ता है तो सभी को उसकी जानकारी हो सके। संघ की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं जिससे इस मंदी के दौर में उद्योग को बाहर निकाला जा सके।
उन्होंने कहा कि अगर किसी उद्योग में नई तकनीक से कार्य होता है तो अन्य उद्यमी वहां से स्टाफ तोड़ने का प्रयास करते हैं। इससे उन्हें कोई फायदा नहीं होता बल्कि दोनों को उल्टा नुकसान होता है। अब संघ की ओर से एक सॉफ्टवेयर लांच किया जाएगा जो सभी संघ के सदस्यों को दिया जाएगा। वार्षिक समारोह में सदस्यता अभियान तेज करने पर बल देते हुए कहा कि इसे बीबीएन में 68 से बढ़ा कर सौ का टारगेट दिया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि बीबीएनडीए के अतिरिक्त सीईओ सतीश शर्मा ने गत्ता संचालकों को हर संभव सहयोग करने की बात कही जिससे प्रतिस्पर्धा के दौर में वह अपने उद्योग को चला सके। इस मौके पर नवीन वत्स, विक्की सिंगला, गुर प्रसाद गुप्ता, अशोक कुमार, गुरदीप चौहान, सशील कुमार, अजय जैन, दिनेश ठाकुर, प्रीतम पाल, प्रवीण, अलोक, निरव समेत बीबीएन के सभी गत्ता संचालक उपस्थित रहे।
बद्दी (सोलन)। वार्षिक समारोह में घटिया स्तर का रॉ मेटिरियल (पेपर) मिलने का मुद्दा छाया रहा। वक्ताओं ने कहा कि उद्योगों को पेपर मिलों से घटिया स्तर का पेपर मिल रहा है। छोटे उद्योग होने के कारण कोई भी उद्यमी डर के मारे अपना मुंह नहीं खोलता है जिससे गत्ता उद्योग में गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।
संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने कहा कि गत्ता उद्योग में 90 फीसदी कच्चे माल का प्रयोग होता। ग्राहक अब गत्ता संचालकों से पेपर की आरसीटी, जीएसएम, बीएफ व नमी को लेकर लिखित में मांगते हैं। बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि गुणवत्ता को लेकर वह चुप न रहे और बाहरी राज्यों से खराब माल आने पर पेपर मिलों का विरोध करें। पैकेज समाप्त होने पर यहां पर काम कम हो रहा है। गत्ता कारोबार से जुड़े कुछ लोग यहां से सिक्किम के लिए पलायन कर रहे हैं। जो लोग यहां से जा रहे हैं वे गत्ता संचालकों की लंबित पेमेंट नहीं दे रहे है जिससे घाटे में चल रहा यह उद्योग बंद होने के कगार पर है।
कार्यकारिणी चुनाव में हेमराज चौधरी को अध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा तेजिंद्र बंसल, सुशील सिंगला, बलराम अग्रवाल को उपाध्यक्ष, अशोक शर्मा को महासचिव, नवीन वत्स को संयुक्त सचिव, बाल किशन सिंगला को कोषाध्यक्ष व बलदेव गोयल व सुरेंद्र जैन को संरक्षक मनोनीत किया गया। नव निर्वाचित अध्यक्ष ने संचालकों को आश्वासन दिया कि वह गत्ते के रेट में सुधार लाने का प्रयास करेंगे। उद्योगों को समय पर पेमेंट दिलाने में उनका योगदान रहेगा तथा ट्रांसपोर्ट की भी जो भी समस्या है उसे दूर करने का उनकी प्राथमिकता रहेगी।