कालका-शिमला हाईवे पर पट्टामोड़ के समीप मलबे काे हटाती जेसीबी। संवाद
सोलन। कालका-शिमला नेशनल हाईवे पांच को बंद हुए एक सप्ताह हो चुका है। मगर इसे खोलने को लेकर केवल तारीखें ही मिल रही हैं। ऐसे में किसान-बागवानों का करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है, वहीं सोलन, शिमला और किन्नौर जिला की पूरी अर्थव्यवस्था भी चरमराने लगी है। इन दिनों सेब सीजन और टमाटर सीजन जोरों पर है। प्रदेश की सब्जियां व फल बाहरी राज्यों की मंडियों में जाता है। जिससे यहां के बागवानों और किसानों को अच्छे दाम मिलते हैं। मगर एनएच बंद होने से जहां परिवहन सुविधा प्रभावित हो चुकी है, वहीं मंडियों से बाहरी राज्यों में फल व सब्जियां समय पर पहुंचाना भी चुनौती बनी हुई है। वहीं एनएचएआई के अधिकारी मंगलवार दोपहर तक फोरलेन खोलने को दावा कर रहे हैं।
हालांकि कंपनी एनएच खोलने को लेकर रोजाना आश्वासन दे रही है। मगर सवाल यह उठ रहे हैं कि करोड़ों रुपये एनएच बनाने के लिए खर्च हुए मगर आज लोग यहां से पैदल तक नहीं निकल पा रहे। कहीं न कहीं नेशनल हाईवे अथॉरिटी पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। क्योंकि यह एनएच उन्हीं की देखरेख में बनकर तैयार हुआ है। हालांकि अभी परवाणू से सोलन तक ही एनएच बन पाया है। मगर शायद ही इसके बनने के बाद इसमें दोनों लेन पर कभी यातायात चल पाया हो।
बीते वर्ष अगस्त में सोलन के समीप शमलेच में बनी टनल को जाने वाली सड़क ढह गई थी जो अब एक साल बाद सुचारू हो पाई है। वहीं अब चक्कीमोड़ के समीप एनएच ढहे एक सप्ताह हो चुका है। मगर यह कब खुलेगा इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
उधर, फोरलेन निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर बलविंदर ने इस बारे में कहा कि बारिश के चलते एनएच ढह गया था। वहीं इसे सुचारू करने के लिए कार्य चल रहा है। इसे खोलने का प्रयास जारी है, मगर पहाड़ी से अधिक मलबा आने के कारण इसे खोलने में दिक्कतें आ रही है।