चूहूवाल में पूर्णाहुति डालते हुए आयोजक स्रोत: संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। चूहूवाल में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार को यज्ञ और पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। अंतिम दिन कथावाचक आचार्य राकेश गर्ग ने सुदामा चरित का वर्णन किया। आचार्य राकेश ने बताया कि सुदामा अत्यंत निर्धन था, जबकि भगवान कृष्ण उसके बालसखा थे। अपनी पत्नी सुशीला के बार-बार कहने पर सुदामा द्वारका अपने मित्र से मिलने गया, लेकिन द्वारपालों ने उसे महल में प्रवेश नहीं दिया। जब कृष्ण को इसकी खबर मिली, तो वे नंगे पांव दौड़ते हुए आए और सुदामा को आदरपूर्वक सिंहासन पर बिठा कर चरण धोए। बिना बताए ही सुदामा की सारी निर्धनता दूर कर दी। उन्होंने उपस्थित लोगों को संदेश दिया कि मित्रता में श्रीकृष्ण-सुदामा जैसी निस्वार्थ भावना होनी चाहिए, जिसमें बड़ा-छोटा या ऊंच-नीच का कोई महत्व न हो। कथा समापन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया।