भराड़ीघाट में चला फोरलेन बनाने का काम।
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राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की मांग पर शिमला-बिलासपुर फोरलेन परियोजना के लिए अब 18 और गांवों में अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। प्रशासन ने इस प्रक्रिया को शुरू कर दिया है और संबंधित भूमि मालिकों को नोटिस भेजना शुरू कर दिया गया है। यह कदम सड़क की चौड़ाई बढ़ाने और स्टोरेज की सुविधाओं के विस्तार के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
परियोजना का वर्तमान परिदृश्य और अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता: शिमला-बिलासपुर फोरलेन परियोजना के निर्माण कार्य में अब तक कुल 48 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। इस अधिग्रहण में 12 हेक्टेयर भूमि सरकारी है, जबकि लगभग 36 हेक्टेयर भूमि निजी है। इस भूमि के अधिग्रहण के लिए प्रभावित लोगों को अब तक करीब 150 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। अब, सड़क की चौड़ाई बढ़ाने और स्टोरेज के लिए एनएचएआई की आवश्यकता को पूरा करने हेतु लगभग 15 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इस अतिरिक्त अधिग्रहण के उपरांत, प्रभावित भूमि मालिकों को लगभग 12 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जाएगा।
यह परियोजना लगभग 16 किलोमीटर लंबे शालाघाट-नलाग खंड पर केंद्रित है, जिसमें तीन सुरंगों का निर्माण भी प्रस्तावित है। सरी से दरयोटा तक लगभग पौने तीन किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा।
प्रभावित होने वाले 18 गांव
जिन 18 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- लहलाणा
- सूरजपुर
- घ्याल खेच
- बटेढ़ दसेरन वाया नलाग
- थाच
- बैहल
- बानंण
- कोटला
- पल्याणी
- कोलका
- धुंनद
- सुसाय मयाणा
- सरी
- कलरवाला
- दरयोटा जंगल
- सालन
- सिम्मू
भूमि अधिग्रहण में विसंगतियों पर चिंता: हाल के दिनों में, फोरलेन और टू-लेन सड़क परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के आंकड़ों में भारी अंतर पाए जाने के कारण प्रदेश सरकार ने चिंता व्यक्त की है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित सभी इकाइयों को वास्तविक स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। विशेष रूप से कीरतपुर-मनाली, शिमला-मटौर, शिमला-परवाणु और नालागढ़ परियोजनाओं के लिए केंद्र के लेआउट प्लान के अनुसार भूमि की पुष्टि की जाएगी। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ रिपोर्टों में मुआवजे की राशि में करोड़ों रुपये का अंतर और अधिग्रहित भूमि के क्षेत्रफल में भी महत्वपूर्ण फर्क पाया गया है। इस मुद्दे पर लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ ने प्रदेश की विशेष भूमि अधिग्रहण इकाइयों और सक्षम प्राधिकरणों से जवाब मांगा है।