खुंब निदेशालय सोलन ने विकसित की डीएमआरओ-18 प्रजाति
हार्ट और किडनी मरीजों को राहत, कोलेस्ट्रॉल और बीपी को भी करेगी कंट्रोल
देश में खुंब अनुसंधान एवं निदेशालय के 32 सेंटरों पर चल रहा है इस पर काम
आकार होगा बड़ा और मोटा, चॉकलेट कलर में तैयार करने में पाई सफलता
ललित कश्यप
सोलन। देश में मशरूम उत्पादन को नई दिशा देने की दिशा में आईसीएआर-मशरूम अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर), सोलन ने एक बड़ी तकनीकी सफलता हासिल की है। निदेशालय के वैज्ञानिकों ने शिटाके मशरूम की नई प्रजाति डीएमआरओ-18 विकसित की है। इस नई किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी आसानी से तैयार हो सकेगी। इससे अब मैदानी और गर्म इलाकों में भी इसके उत्पादन का रास्ता साफ हो गया है।
यह नई प्रजाति औषधीय गुणों से भी भरपूर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के अनुसार, डीएमआरओ-18 शिटाके मशरूम हृदय और गुर्दे के मरीजों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करती है। वैज्ञानिक डॉ. परमेश के अनुसार, इससे पहले शिटाके मशरूम की खेती के लिए 18 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती थी, जिसके कारण इसकी खेती ठंडे इलाकों तक ही सीमित थी। अब नई किस्म के आने से देश के मैदानी और अधिक तापमान वाले राज्यों में भी किसान इसका उत्पादन कर सकेंगे।
खुंब अनुसंधान निदेशालय के वैज्ञानिकों ने करीब 60 दिनों में फसल देने वाली इस नई प्रजाति का सफल परीक्षण किया है। पूर्व में उपलब्ध प्रजाति का आकार छोटा, रंग हल्का गुलाबी (पिंक) और बाजार मूल्य अपेक्षाकृत कम था। इसके विपरीत डीएमआरओ-18 का आकार काफी बड़ा और मोटा है तथा इसका रंग आकर्षक चॉकलेट जैसा होगा। इससे किसानों को बाजार में इसके बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।
कोट
“डीएमआरओ-18 शिटाके मशरूम देश के मशरूम उद्योग में क्रांति ला सकती है। इस नई किस्म पर खुंब अनुसंधान निदेशालय के देशभर में स्थित 32 केंद्रों पर बहु-स्थानिक परीक्षण चल रहा है। परीक्षण सफल रहने के बाद इसे देशभर के किसानों के बीच वितरित किया जाएगा। इससे कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।”
डॉ. बृज लाल अत्री, कार्यकारी निदेशक, डीएमआर सोलन