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बिजली-पानी की खपत अनुसार लगेगा सेनिटेशन टैक्स

Sun, 29 Nov 2015 11:05 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोलन।
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शहर में अवैध रूप से चले रहे पीजी और व्यावसायिक संस्थान नगर परिषद के निशाने पर है। टैक्स से बचने के लिए शहर में बड़े पैमाने पर चल रहा यह कारोबार जल्द टैक्स के दायरे में आएगा। नगर परिषद के भौगोलिक जांच सर्वेक्षण (जीआईएस सेटेलाइट मैपिंग) से यह संभव होगा जिसका सर्वे अंतिम चरण में है। इसमें हर भवन के मासिक बिजली और पानी के बिलों का डाटा फीड किया जाएगा। बिल्डिंग में तय सदस्यों के हिसाब से अगर बिजली, पानी की खपत अधिक आई तो उस हिसाब से सेनिटेशन टैक्स लगाया जाएगा।
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जीआईएस के तहत इस कवायद को अंजाम दिया जा रहा है। इससे ऐसे भवन मालिकों का आसानी से पता लगाया जा सकेगा जो अपने घरों में पीजी चला रहे हैं, या घरेलू परिसर में व्यावसायिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। सोलन में कई निजी कॉलेज व यूनिवर्सिटी हैं जिसमें हजारों छात्र शिक्षारत हैं।

सैकड़ों छात्र पीजी के तौर पर चल रहे हैं। इसमें छात्रों व नौकरी पेशा लोगों से पीजी मालिक हजारों रुपये ले रहे हैं, लेकिन नगर परिषद ऐसे भवन मालिकों पर अतिरिक्त टैक्स लगा पाने में नाकाम है। आलम यह है कि एक बहुमंजिला भवन में 50 से अधिक लोग रह रहे हैं। जबकि नगर परिषद को अन्य लोगों की तरह सामान्य टैक्स दे रहे हैं जिससे नगर परिषद को हर माह लाखों का चूना लग रहा है।
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जीआईएस प्रोजेक्ट आफिसर जमील अहमद ने बताया कि भौगोलिक जांच सर्वेक्षण में आवासीय और व्यावसायिक तौर पर उपयोग किए जाने वाले पानी और बिजली की औसत खपत का एक महीने का डाटा फीड किया जाएगा। इस तरह यह पहचान पाने में भी आसानी होगी की भवन मालिक के परिवार के सदस्यों के अतिरिक्त वहां कितने लोग रहते हैं। उसी के आधार पर नगर परिषद जांच को आगे बढ़ा सकती है।

इस बारे में नगर परिषद के अध्यक्ष कुल राकेश पंत ने कहा कि शहर में बढ़ रहे पीजी मालिकों व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर जीआईएस सर्वे के बाद टैक्स लगाने में नगर परिषद को आसानी होगी। ऐसे भवन मालिकों पर भी शिकंजा कसा जा सकेगा जो परिषद को हर माह लाखों की आर्थिक हानि पहुंचा रहे है।
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