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Solan News: जिले में बंद किए स्कूलों के भवन बने खंडहर, परिसर में उगीं झाड़ियां

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विभाग और जिला प्रशासन ने 20 भवनों को अन्य विभागों को किया हस्तांतरित
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लाखों रुपये की लागत से बनीं इमारतों की दीवारों से झड़ने लगा प्लास्टर
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। प्रदेश सरकार की ओर से कम छात्र संख्या वाले सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के बाद अब इन परिसरों की देखरेख पर संकट खड़ा हो गया है। जिले में बंद पड़े दर्जनों प्राथमिक और मिडल स्कूलों के भवन खंडहर में तब्दील हो गए हैं। लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई इन इमारतों की दीवारों से प्लास्टर (पलस्तर) झड़ने लगा है। स्कूल परिसरों में झाड़ियां उग आई है। अब तक 20 बंद पड़े स्कूल भवनों को अन्य सरकारी विभागों को हस्तांतरित किया जा चुका है।
जिले में कुल 53 मिडल और प्राथमिक स्कूलों को बंद किया गया है। इनमें 48 प्राथमिक और 5 मिडल स्कूल शामिल हैं। ताले लटकने के बाद से ही इन भवनों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। उचित रखरखाव न होने के कारण बारिश और मौसम की मार से इमारतें दिन-प्रतिदिन जर्जर होती जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को इन परिसरों के इस्तेमाल के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए, ताकि सरकारी संपत्ति को बर्बाद होने से बचाया जा सके।
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इनसेट
धर्मपुर खंड के दो स्कूल भवन असुरक्षित घोषित
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बंद किए गए स्कूलों में से 5 स्कूल ऐसे थे, जिनके पास अपने भवन ही नहीं थे। वहीं शिक्षा खंड धर्मपुर के अंतर्गत आने वाले गढियार और कठनी स्थित दो सरकारी स्कूल भवनों की हालत खस्ता हो चुकी है। प्रशासन ने इन दोनों भवनों को असुरक्षित घोषित करते हुए इन्हें डिस्मेंटल करने के आदेश जारी किए हैं।
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कोट
भवनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने कदम उठाए हैं। अब तक 20 बंद पड़े स्कूल भवनों को अन्य सरकारी विभागों को हस्तांतरित किया जा चुका है। इन भवनों में वर्तमान में पंचायतघर, आंगनबाड़ी केंद्र और अन्य सामुदायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। हालांकि, अभी भी कई इमारतें खाली पड़ी हैं, जिनको लेकर भी योजना बनाई जा रही है। -कुमारी रीता गुप्ता, शिक्षा उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा
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