दभोटा में श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करते हुई महिलाएं। संवाद
दभोटा में श्रीमद्भागवत कथा पूर्णाहूति के साथ संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। दभोटा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन व्यासपीठ पंडित मदन लाल दुर्वासा ने रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी बुद्धिमान, सुंदर और सरल स्वभाव वाली थीं। पुत्री के विवाह के लिए पिता भीष्मक योग्य वर की तलाश कर रहे थे। राजा के दरबार में जो कोई भी आता वह श्रीकृष्ण के साहस और वीरता की प्रशंसा करता। कृष्ण की वीरता की कहानियां सुनकर देवी रुक्मिणी ने उन्हें मन ही मन अपना पति मान लिया था। रुक्मिणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह चेदी नरेश राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। रुक्मिणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक से श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मिणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। इसके साथ ही पंडित ने कृष्ण सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि किस प्रकार कृष्ण ने सुदामा की सहायता की थी। इसके बाद पूर्णाहुति हुई, जिसमें ग्रामवासियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। कथा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था जिसमे हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।