फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Solan News: कृषि केंद्रों से मांगी सूखे से हुए नुकसान की रिपोर्ट

Sun, 02 Jun 2024 11:28 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
विज्ञापन
विज्ञापन
टमाटर, शिमला मिर्च समेत अन्य फसलों को पहुंचा है नुकसान
विज्ञापन


विभाग ने सूखे से हो रहे नुकसान का आंकलन करना किया शुरू

कृषि केंद्रों को दो दिन में उपनिदेशक को सौंपनी होगी रिपोर्ट

संवाद न्यूज एजेंसी

सोलन। जिले में लंबे समय से सूखे के कारण खड़ी फसलें खेतों में ही मुरझा गई हैं। इससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में तो फसलें तबाह होना भी शुरू हो गई हैं। वहीं अब जिला कृषि विभाग ने भी सभी कृषि केंद्रों से नुकसान का आंकलन करने को कहा है। जिसकी रिपोर्ट दो दिन में उपनिदेशक कार्यालय में सौंपने को कहा है।

जानकारी के अनुसार जिला सोलन में किसान बागवान बेसब्री से बारिश का इंतजार कर रहे हैं। सूखे के चलते फसलों की बढ़वार भी रुक गई है। असिंचित क्षेत्रों में तो फसलें पूरी तरह चौपट होती जा रही हैं। जिले की करीब पांच हजार से अधिक हेक्टेयर पर फसलों के नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा गुठलीदार, सेब समेत अन्य फलों पर भी इसका असर दिखना शुरू हो गया है। बढ़ते तापमान से सब्जियां सूखकर नष्ट होने लग गई हैं। इसमें सबसे अधिक नुकसान टमाटर और शिमला मिर्च को पहुंच रहा है। जिला में 8100 हेक्टयेर भूमि पर टमाटर की खेती होती है। 90 प्रतिशत किसानों की आय का मुख्य साधन टमाटर ही है। जिले के 65 प्रतिशत किसान बारिश पर ही निर्भर हैं। उधर, कृषि उपनिदेशक डॉ. आरसी चौधरी ने बताया कि सभी कृषि केंद्रों से सूखे से हो रहे नुकसान का आंकलन करने को कहा गया है। जिसकी रिपोर्ट दो दिन में उन्हें सौंपनी होगी। जिसके बाद यह रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाएगी। बारिश न होने से फसलें तबाह हो रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इनसेट

भूजलस्तर भी गिरा

नवंबर से लेकर मार्च तक होने वाली बारिश के कारण जमीन में नमी बनी रहती है और गर्मियों तक भूजल संचित रहता है। इन दो माह के बीच नाममात्र की बारिश होने के कारण भूजल स्तर भी काफी गिर गया है, जिससे पेयजल संकट भी बढ़ने लग गया है। इसके अलावा इन महीनों में होने वाली बारिश से खेतों में फसलों के अलावा अन्य घास भी उग आती थी, जिससे पशुओं का पेट भी भरता था। इस बार न तो किसानों की फसलें हो पाई हैं और घास की भी कमी हो गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें