सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटने लगी है।
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सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटने लगी है। इसका असर सीधे स्कूलों की रिपेयर और अधोसंरचना विकास पर दिखने लगा है। कम एनरोलमेंट के चलते स्कूलों के रिपेयर बजट पर पचास फीसदी कैंची तक चल रही है। कामन पूल (बिल्डिंग फंड) की राशि कम एकत्र होने से स्कूलों को डिमांड के मुताबिक बजट मुहैया करवाना शिक्षा विभाग के लिए टेड़ी खीर साबित हो रही है।
यह खुलासा स्कूलों द्वारा कामनपूल (बिल्डिंग फंड) के तहत मांगे बजट की स्वीकृति से हुआ है। इसकी पुष्टि उपनिदेशक जीवन शर्मा ने की है। 19 स्कूलों के प्रधानाचार्यों एवं अध्यापकों की इस संदर्भ में बैठक हो चुकी है।
स्कूलों के भवनों की रिपेयर के लिए लगभग 35 लाख की राशि की मांग की गई। इस पर कमेटी ने विस्तृत छानबीन के बाद उच्च पाठशाला कामनपूल निधि से कुल 15 लाख रुपये ही मंजूर हुए हैं। यह भी निर्देश जारी हुए हैं कि विभाग द्वारा जारी की गई धनराशि को केवल स्कूलों के भवनों के निर्माण और रख रखाव पर ही खर्च किया जाए।
किस स्कूल को कितनी राशि मिली
ममलीग 80 हजार
कवारग 80 हजार
घरेड् 60 हजार
चमदार 1 लाख
गुलरवाला 80 हजार
मांगल 1.15 लाख
बनीमटेर्नी 1 लाख
सौर 1 लाख
अर्की 70 हजार
चंडी 1 लाख
गुगाघाट 50 हजार
छियाछी 1 लाख
भूमती 1.50 लाख
रखेड़ा ननोवाला 1 लाख
देवठी 1 लाख
लोहारघाट 1 लाख
क्या है कामनपूल निधि
स्कूलों द्वारा नौवीं से लेकर जमा दो कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों से दाखिले के समय से लेकर साल के अंतिम माह तक स्कूल फीस के साथ भवन शुल्क लिया जाता है। सभी स्कूलों द्वारा इकट्ठा राशि में से आधी राशि को शिक्षा विभाग को सौंपा जाता है। इसे कामनपूल निधि कहा जाता है। नौवीं और दसवीं के विद्यार्थियों से साल भर और जमा एक तथा जमा दो कक्षा के विद्यार्थियों से साल में दो बार भवन राशि ली जाती है।
किस काम आती है यह राशि
स्कूल द्वारा भवनों के रखरखाव, रिपेयर और फर्नीचर जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए कामनपूल निधि का उपयोग किया जाता है। इसके लिए संबंधित स्कूल को शिक्षा विभाग को निर्माण में कुल लागत आने वाली राशि का आकलन देना होता है। इसके बाद यह राशि स्वीकृत की जाती है।
यह है पेंच
एक अनुमान के मुताबिक इन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या करीब आठ हजार बताई जा रह है। दो तीन सालों में यह संख्या 25 से 30 फीसदी से अधिक तक कम हुई है। निजी स्कूलों के बेहतर रिजल्ट और सोलन जिला में प्रवासी मजदूृरों की अधिक संख्या का सरकारी स्कूल में इनरोलमेंट घटने का कारण है। बेहतर सुविधाओं के अभाव और अच्छे रिजल्ट न आने से अभिभावकों का रुझान सरकारी स्कूलों से कम होने लगा है। प्रवासी श्रमिकों का समय-समय पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले जाना भी स्कूलों में छात्रों की कमी का कारण बन रहा है।