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3000 ट्रक ऑपरेटरों के 10.5 करोड़ फंसे

Wed, 03 Feb 2016 07:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, दाड़लाघाट (सोलन)
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वित्तीय संकट के चलते जेपी सीमेंट उद्योग बागा में ढुलाई में लगे 3000 ट्रक ऑपरेटरों का 10.5 करोड़ रुपए फंस गया है।  पिछले तीन हफ्तों से कंपनी द्वारा किराए की अदायगी नहीं किए जाने पर भारी आक्रोश है। ऑपरेटरों ने जल्द पेमेंट करने की मांग प्रबंधन से उठाई है। अधिकांश ऑपरेटर दाड़लाघाट व आसपास के क्षेत्रों से हैं। ऑपरेटरों का तर्क है कि वे पहले से ही अनियमित और अपर्याप्त डिमांड की मार झेल रहे हैं। अब कंपनी द्वारा उनके माल भाड़े की पेमेंट रोकने से उन पर आर्थिक संकट आ गया है। अगर यही हाल रहा तो ऑपरेटर उद्योग के मुख्य गेट पर ट्रक खड़े करके प्रदर्शन करेंगे। ट्रक ऑपरेटरों सुरेंद्र वर्मा, अमर चंद ठाकुर, सुरेश शर्मा, अजित सेन, तरसेम ठाकुर, राज सिंघानिया, पिंकू राम सुरजीत सिंह सेन, बबलू पंवर, केशव राम, विजय कुमार भरत कंवर रिंकू, पवन कुमार, लक्ष्मी शर्मा, बद्री ठाकुर ओम प्रकाश, विनोद शर्मा, विकाश ठाकुर, मनोज ठाकुर ने बताया कि बिना पैसों के उन्हें ट्रकों को चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी में वर्तमान में छह सहकारी सभाओं के ट्रक दौड़ रहे हैं। इस दौरान गेट मीटिंग का दौर चला हुआ है।
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ऑपरेटरों का कहना है कि पैसों के अभाव में लगभग 60 प्रतिशत गाड़ियां खड़ी करने की नौबत आ चुकी है। सिंगल ट्रक वाले ऑपरेटरों पर इसकी सबसे अधिक मार पड़ी है। समय रहते बैंकों ऋण की अदायगी नहीं हो पा रही है। कंपनी को जल्द से जल्द पेमेंट करनी चाहिए, ताकि ऑपरेटरों को राहत मिल सके। उन्होंने प्रदेश सरकार और वित्तीय संस्थाओं से आर्थिक संकट वाले दौर में रियायत बरतने की अपील की है।
 
उधर, कंपनी के सीनियर वाइस प्रेजीडेंट वीएन झा ने कहना है कि कुछ समस्या चल रही है। जिसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। कंपनी द्वारा बैंक बदलने की वजह से यह समस्या आई है। जिसे जल्द सुलझा लिया जाएगा जल्द ही सारे ऑपरेटरों के माल भाड़े की अदायगी कर दी जाएगी। उन्होंने ऑपरेटरों से संयम बरतने की अपील की है।
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सहकारी सभाओं के प्रभावित ट्रक आपरेटर 06 फरवरी को बैठक में आगामी रणनीति तैयार करेंगे। जानकारी देते हुए ट्रक आपरेटरों ने कहा कि इस दौरान जो भी निर्णय लिया जाएगा, उस हिसाब से प्रदर्शन और रोष कार्यक्रमों का आयोजन होगा। उन्होंने कहा कि पहले ही कम डिमांड की मार झेल रहे आपरेटरों को घर चलाना मुश्किल हो गया है। अगर यही हाल रहा तो ट्रकों को फाइनेंस कंपनियां ले जाएंगी, जिसे कतेई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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