जोनल अस्पताल सोलन में मंगलवार को चिकित्सा सुविधाएं हाशिये पर रहीं। एक तरफ जहां आठ चिकित्सक अस्पताल में ड्यूटी देने नहीं पहुंचे थे वहीं दूसरी तरफ बिजली के कट ने लोगों को खूब सताया। हालांकि अस्पताल में जनरेटर चलाया गया लेकिन पर्याप्त वोल्टेज न होने पर एक्सरे तथा अल्ट्रासाउंड की मशीनें नहीं चली। इस कारण स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहीं।
लोगों को निजी क्लीनिकों में जाकर अल्ट्रासाउंड और एक्सरे करवाना पड़ा। दूसरी तरफ पांच चिकित्सक अवकाश पर रहे और तीन चिकित्सकों की ड्यूटी अर्की में कैंप के दौरान लगा दी गई। ऐसे में मंगलवार का दिन रोगियों के लिए भारी आफत भरा गुजरा। रोगियों ने चिकित्सकों को एकसाथ अवकाश न देने तथा ऐसी परिस्थितियों में वैकल्पिक इंतजाम करने की अस्पताल प्रबंधन से मांग की। इससे की दूर-दूर से आए रोगियों को परेशानी का सामना न करना पड़ा। जोनल अस्पताल मेें नई और पुरानी मिलाकर करीब 1200 की ओपीडी है।
निजी क्लिनिक कूट रहे चांदी
सरकारी अस्पताल में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड सेवा ठप होने का फायदा निजी क्लिनिक उठा रहे हैं। मजबूरन लोगों को यह टेस्ट करवाने के लिए इन निजी क्लिनिक का रुक करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में जहां एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के लिए 150 से 200 रुपये लिए जाते है। वहीं इन क्लिनिक में 500 से 600 रुपये तक वसूले जा रहे हैं जो मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहा है।
डॉक्टर तक पहुंचना मुश्किल
सोलन की स्थायी निवासी कांता देवी ने बताया कि वह इलाज करवाने अस्पताल आई है लेकिन यहां इतनी लंबी लाइन है कि डॉक्टर तक पहुंचते-पहुंचते लंच टाइम हो जाएगा। इसके बाद डॉक्टर लंच के लिए चले जाएंगे। शाम होते-होते ही नंबर लग सकेगा। फिर टेस्ट के लिए कहेंगे तो कल का दिन इसी काम में चला जाएगा। इलाज शुरू होने तक दर्द सहते रहने के सिवाय कोई चारा नहीं।
टेस्ट रिपोर्ट किसे दिखाएं
उमा देवी ने बताया कि वह काफी दिनों से अस्पताल के चक्कर काट रही हैं। डॉक्टर द्वारा बताए सारे टेस्ट भी करवा लिए हैं लेकिन अब टेस्ट दिखाने के लिए दो दिन से अस्पताल आ रही हैं। डॉक्टर ही नहीं हैं। एक ओर बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं उन्हें देखने वाला भी कोई नहीं। दूसरा डॉक्टर बात तक नहीं सुनते। ऐसे में मरीज राम भरोसे ही है।
निजी क्लिनिकों में खर्चा ज्यादा
गीतिका देवी ने बताया कि वह अपना इलाज करवाने दूर से आई हैं। लेकिन डॉक्टर नहीं होने से उन्हें कल फिर अस्पताल आना होगा। निजी अस्पताल में इलाज का खर्चा ज्यादा होने के चलते वहा भी नहीं जा सकते। अस्पताल प्रबंधन को डॉक्टरों की संख्या को बढ़ाना चाहिए। इससे मरीजों को अच्छा इलाज मिल सके।
एक डॉक्टर नाकाफी
गायनी विभाग में अपना इलाज करवाने आई सुमन ने बताया कि अस्पताल में सबसे ज्यादा भीड़ गाइनोकोलॉजी विभाग में होती है। लेकिन मात्र एक डाक्टर होने से गर्भवती महिलाओं को खासी परेशानी हो रही है। मरीजों की संख्या इतनी होती है कि महिलाओं को फर्श पर ही बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। सरकार सोलन अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या को क्यों नहीं बढ़ाती। डॉक्टरों के आने से समस्या का हल हो जाएगा।
कितने पद चाहिए, कितने स्वीकृत
200 बिस्तरों वाले क्षेत्रीय अस्पताल में सोलन के साथ सिरमौर, नौणी, राजगढ़, ओच्छघाट, कंडाघाट और धर्मपुर जैसे क्षेत्रों से मरीज अपना इलाज करवाने रोजाना आते हैं। वर्तमान में अस्पताल में केवल 18 डॉक्टर ही अपनी सेवाएं दे रहे है। जरूरत करीब 35 डॉक्टरों की है। अस्पताल प्रबंधन भी यह मानता है कि डॉक्टरों की संख्या मरीजों की संख्या के मुकाबले बहुत कम है। ऐसे में सस्ता इलाज करवाने यहां आ रहे मरीजों को डॉक्टर नहीं मिलने से वह अस्पताल के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
विभाग से कर चुके हैं मांग : एमएस
क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) डॉ. महेश गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से बार बार अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की मांग लिखित और मौखिक रूप से की है। लेकिन अभी इसका कोई जवाब नहीं आया है। मंगलवार को अस्पताल के 5 डॉक्टर अवकाश पर जबकि 3 डाक्टर अर्की में स्वास्थ्य कैंप में व्यस्त रहे। बाकी बचे सभी डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके साथ ही बिजली कट के कारण अस्पताल में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे। रूटीन के ऑपरेशन ही किए जा रहे हैं॥