शूलिनी मेले में महाभारत काल की युद्ध शैली पर होगा ठोडा नृत्य
जिला सिरमौर, शिमला और सोलन की टीमें लें कार्यक्रम में भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। महाभारत काल की युद्ध शैली को सोलन, सिरमौर समेत शिमला के दूरदराज के ग्रामीणों ने ठोडा नृत्य के रूप में जीवंत रखा है। सोलन में मां शूलिनी मेले के दौरान शनिवार को इस नृत्य का ठोडो मैदान में प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें पाशी और शाठी दलों के बीच तीरंदाज होगी। विजेता टीम को मेला कमेटी की ओर से सम्मानित भी किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार ठोडा नृत्य को देखने के लिए ठोडो मैदान में भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। विशेष लिबास पहने ठोडा के खिलाड़ी न सिर्फ विरोधी आक्रमण झेलते हैं, बल्कि धनुष और बाण से उसका जवाब भी देते हैं। ठोडा नृत्य के इस युद्ध में थककर बाहर होने वाले को हारा हुआ माना जाता है। इस खेल में जिला सिरमौर, शिमला और सोलन की टीमें भाग लेंगी। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। ठोडो कमेटी के अध्यक्ष राजीव ठाकुर ने बताया कि तीर कमान के इस खेल में पाशी और शाठी के दो दल एक दूसरे के खिलाफ खेलते हैं। यह खेल सतयुग से खेला जा रहा है। पहले यह युद्ध शैली थी जो अब खेल का रूप ले चुकी है। इस खेल में प्रयोग किए जाने वाले तीर विशेष चांव की लकड़ी से बनते हैं। इसमें हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के पास तीर कमान, ढांगरू, सिलारा, डागरा और चमड़े का जूता पहना जाता है। खेल में पैर पर तीर मारने पर फाउल माना जाता है।