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Solan News: दाड़लाघाट में पीडब्ल्यूडी के स्टोर में भड़की आग से मची अफरा-तफरी

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दाड़लाघाट में पीडब्ल्यूडी स्टोर में लगी आग - फोटो : घटना के बाद मौके पर मौजूद नसीरपुर पुलिस। स्रोत पुलिस
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पुराने दस्तावेज और उपकरण जलकर राख,
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अर्की से बुलानी पड़ी दमकल विभाग की टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट(सोलन)। दाड़लाघाट स्थित लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के स्टोर में रविवार शाम अचानक भीषण आग लग गई। आग लगने की घटना से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग से पुराने दस्तावेज और उपकरण जलकर राख हो गए। आग पर काबू पाने के लिए सबसे पहले अंबुजा सीमेंट से फायर ब्रिगेड बुलाई गई, लेकिन उसमें करीब 200 लीटर पानी ही होने के कारण राहत कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने भी बाल्टियों में पानी भर-भरकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग तेजी से फैल चुकी थी, जिससे उस पर तुरंत काबू पाना संभव नहीं हो पाया। स्थिति गंभीर होने पर अर्की से अग्निशमन विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया। अग्निशमन कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हालांकि आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि दाड़लाघाट जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में आपातकालीन सुरक्षा सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे ऐसी घटनाओं में जोखिम बढ़ जाता है।
उधर, सेवानिवृत्त फायर ऑफिसर बंसी राम भाटिया ने कहा कि दाड़लाघाट जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में अग्निशमन विभाग की सुविधा का न होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पूरे अर्की क्षेत्र के लिए केवल एक ही अग्निशमन केंद्र सहारा बना हुआ है, लेकिन किसी भी आपात स्थिति में यह व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं होती। उन्होंने कहा कि दाड़लाघाट में दमकल विभाग की सुविधा न होने के कारण हर बार अर्की से फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को बुलाना पड़ता है। ऐसे में जब तक दमकल वाहन मौके पर पहुंचते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। पूर्व उपप्रधान राजेश गुप्ता ने भी दाड़लाघाट में स्थायी अग्निशमन विभाग कार्यालय और दमकल वाहन की व्यवस्था करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों और आबादी को देखते हुए यहां फायर स्टेशन की स्थापना समय की आवश्यकता बन चुकी है।
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आग लगने के कारणों का नहीं चल पाया पता
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता का कहना है कि आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। उन्होंने कहा कि आग में वर्ष 1990 के बाद के पुराने महत्वपूर्ण दस्तावेज और जरूरी उपकरण जल चुके हैं। फिलहाल विभाग की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक नुकसान और आग लगने के कारणों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी।
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