भवन निर्माण पूरा होने के बाद भी जंजघर में चल रहा इलाज
नौ जुलाई को कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हो गया था प्रदीप
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी(सोलन)। रामशहर के पंदल गांव के कारगिल शहीद प्रदीप कुमार के नाम पर हुईं सभी घोषणाएं तो पूरी हो गईं, लेकिन शहीद के नाम पर डिस्पेंसरी अभी तक जंजघर में ही चल रही है। सरकार ने डिस्पेंसरी के लिए भवन तो बना दिया है लेकिन उद्घाटन न होने से इसे जनता को समर्पित नहीं किया गया है।
जानकारी के अनुसार नौ जुलाई को कारगिल युद्ध के दौरान रामशहर के पंदल गांव के प्रदीप शहीद हो गए थे। शहीद का बड़ा भाई भी सेना में भर्ती था। जिससे उसके पिता जग्गनाथ कौशल और माता रामेश्वरी देवी ने अपने बड़े बेटे देवेंद्र कौशल को वापस बुला लिया। यहां आने के बाद देवेंद्र कौशल को राजस्व विभाग में नौकरी मिल गई थी, लेकिन पांच साल पहले अचानक बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई। अब जग्गनाथ पर पत्नी, देवेंद्र कुमार की पत्नी, तीन पोतियां और एक पोते की जिम्मेदारी आ गई है। सरकार ने प्रदीप कुमार के गांव पंदल में सड़क पहुंचा दी है। गांव का स्कूल भी दसवीं तक कर दिया है।
शहीद के पिता के नाम गैस एजेंसी भी खुल गई है लेकिन शहीद के नाम पर खोली गई डिस्पेंसरी अभी तक जंजघर में चल रही है। सरकार ने डिस्पेंसरी का भवन तो बना दिया है लेकिन उद्घाटन न होने से उसे नए भवन में शिफ्ट नहीं किया गया है। उधर, इस संबंध में नालागढ़ की बीएमओ डॉ. मुक्ता रस्तोगी ने बताया कि जल्द ही भवन का उद्घाटन कराने के बाद इसे नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिया जाएगा।