एसडीएम नालागढ़ से मिला चार पंचायतों का प्रतिनिधिमंडल
बोले, अगर स्टोन क्रशर को मंजूरी दी तो करेंगे आंदोलन, कोर्ट जाएंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। पहाड़ी क्षेत्र के कोईड़ी और धार कोटला गांव में प्रस्तावित स्टोन क्रशर और उसके लिए सरकारी और निजी भूमि को लीज पर देने के प्रस्ताव के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को ग्रामीणों ने एसडीएम नालागढ़ के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजा। इसमें स्टोन क्रशर को मंजूरी न देने की मांग उठाई।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि तीन वर्षों से लगातार भारी बारिश के कारण क्षेत्र भूस्खलन और भारी भूमि कटाव की चपेट में है। बीते वर्ष आई आपदा के दौरान नालागढ़-शिमला मुख्य मार्ग करीब दो महीने तक पूरी तरह बंद रहा। इससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण कर्मचंद, जगदीश, सोमनाथ, सोहनलाल, संतराम, मनसा राम, कृष्ण, दिलाराम, जय किशन, अनिल कुमार, निक्कूराम ने कहा कि क्षेत्र में हुए भारी भूस्खलन से पूरे का पूरा पहाड़ और कई घर और खेत बर्बाद हो चुके हैं। ऐसे में स्टोन क्रशर के लगने से अवैध खनन को बढ़ावा मिलेगा। इससे आने वाले समय में गांव के हजारों लोग बर्बाद हो जाएंगे।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर स्टोन क्रशर को किसी तरह से चलाने व लगाने की अनुमति दी गई तो मजबूरन उन्हें उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ेगा। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की जाएगी। साथ ही ग्रामीण इसके खिलाफ आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे और सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
वार्ड मेंबर किशन कुमार ने कहा कि अगर क्रशर के लिए प्रधान की ओर से एनओसी दी गई है, तो यह गलत है क्योंकि किसी भी वार्ड सदस्य से कोई बातचीत नहीं की गई। न ही इस बारे में किसी को जानकारी दी गई। अगर पंचायत सचिव भी इसकी रिपोर्ट बनाता है, तो कम से कम वार्ड सदस्यों को भी बताया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित स्टोन क्रशर के लिए होने वाला खनन यदि अवैज्ञानिक और अवैध तरीके से किया गया, तो इससे स्थानीय पर्यावरण, जंगलों और बची-खुची कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचेगा।
एसडीएम नरेंद्र आहलुवालिया ने बताया कि ग्रामीणों ने प्रस्तावित स्टोन क्रशर पर एतराज जताया है। इस मामले की जांच करवाई जाएगी और खनन विभाग से जानकारी लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।